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बिलकिस बानो रेप केस : सुप्रीम कोर्ट का सवाल- सजायाफ्ता डॉक्टर और पुलिसवाले काम कैसे कर सकते हैं?

गुजरात सरकार से इस संबंध में पूछा है कि दोषी पुलिस वालों व डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है, ये बताएं.

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बिलकिस बानो रेप केस : सुप्रीम कोर्ट का सवाल- सजायाफ्ता डॉक्टर और पुलिसवाले काम कैसे कर सकते हैं?

खास बातें

  1. सजायाफ्ता पुलिसवाले व डॉक्टर काम कैसे कर सकते हैं?
  2. बिलकिस बानो मुआवजे के लिए याचिका दाखिल करे
  3. मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद होगी
नई दिल्ली: 2002 के गुजरात का बिलकिस बानो रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि केस में सजायाफ्ता पुलिसवाले व डॉक्टर काम कैसे कर सकते हैं? गुजरात सरकार से इस संबंध में पूछा है कि दोषी पुलिस वालों व डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है, ये बताएं. कोर्ट ने बिलकिस बानो को मुआवजे के लिए अलग से याचिका दाखिल करने को कहा है, जिस पर चार हफ्ते बाद सुनवाई होगी. 

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दरअसल, बिलकिस बानों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि इस केस में उसे और भी मुआवजा दिलाया जाए. साथ ही कहा गया कि जिन चार पुलिसवालों व दो डॉक्टरों को हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था, उनकी जानकारी के मुताबिक- उन्हें सरकार ने वापस काम पर रख लिया है. कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब मांगने के साथ ही बिलकिस को कहा है कि वह मुआवजे के लिए अलग से याचिका दाखिल करे. वहीं गुजरात सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिसवालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.

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कुछ वक्त पहले कोर्ट ने जांच में गड़बड़ी और सबूत छिपाने के दोषी करार पुलिस अफसर RS भगोरा, चार अन्य पुलिस अफसर व दो डाक्टरों की याचिका खारिज कर दी थी. सभी की सजा बना रहेगी. दोनों डाक्टरों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने डाक्टर होने के बावजूद पुलिस के कहने पर रिपोर्ट लिखी, ये आपने अपने पेशे के साथ सही नहीं किया.

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2002 के गुजरात के बिलकिस बानो रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दोषी करार पुलिस अफसर RS भगोरा, चार अन्य पुलिस अफसर व दो डाक्टरों की याचिका पर सुनवाई हुई थी.

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याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट को दोषी करार देने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले ही भगौरा जेल से रिहा हो चुका है क्योंकि वह सजा काट चुका है, इसलिए मामले में कोई अर्जेंसी नहीं है. फिलहाल हाईकोर्ट के दोषी करार देने के फैसले पर रोक नहीं लगाएंगे.

भगौरा व पुलिसवालों को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने दोषी करार दिया था, हालांकि कोर्ट ने जितनी सजा काटी, उसे काफी बताया था और 15 हजार का जुर्माना किया था. भगौरा ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी.


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