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असम में एनआरसी में छूटे 40 लाख लोगों के लिए अपनाई जाएगी यह प्रक्रिया

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में एसओपी दाखिल की, अंतिम एनआरसी दावों की सुनवाई के बाद जारी होगा और आपत्तियों को उचित प्रक्रिया के बाद इसे पूरा किया जाएगा

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असम में एनआरसी में छूटे 40 लाख लोगों के लिए अपनाई जाएगी यह प्रक्रिया

प्रतीकात्मक फोटो.

खास बातें

  1. 30 अगस्त से 28 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी
  2. फॉर्मों का डिजिटलीकरण 15 सितंबर से 20 नवंबर तक किया जाएगा
  3. 20 से 30 नवंबर तक नोटिस जारी होंगे, सुनवाई 15 दिसंबर से शुरू होगी
नई दिल्ली: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसओपी दाखिल किया है. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे में 40 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए यह मानक कार्रवाई प्रक्रिया (SOP) दाखिल की गई है.

राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के मसौदे में 40 लाख लोगों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए SOP (Standard operating procedures) को अपनाया जाएगा. एनआरसी में छोड़े गए लोगों की आशंका को खारिज करते हुए केंद्र ने कहा कि अंतिम एनआरसी दावों की सुनवाई के बाद जारी होगा और आपत्तियों को उचित प्रक्रिया के बाद इसे पूरा किया जाएगा.

यह कहा गया है कि दावों की जांच करने वाले अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतेंगे कि अंतिम एनआरसी में कोई अवैध व्यक्ति का नाम शामिल नहीं है.

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अपने हलफनामे में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि गैर-समावेश के कारणों के बारे में लोगों को सूचित करने की प्रक्रिया 10 अगस्त को शुरू की गई थी. 30 अगस्त से 28 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी. फॉर्मों का डिजिटलीकरण और प्रसंस्करण 15 सितंबर से 20 नवंबर तक लिया जाएगा. 20 से 30 नवंबर तक एनआरसी में छोड़े गए प्रत्येक व्यक्ति को नोटिस जारी किए जाएंगे और सुनवाई 15 दिसंबर से शुरू होगी. निपटान के लिए समय सीमा केवल तभी तय की जा सकती है जब प्राप्त दावों/आपत्तियों की वास्तविक संख्या ज्ञात हो.

यह  SOP दावा दायर करने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है. यह भी तय करता है कि पहचान साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज कैसे दर्ज कर सकता है. पूरे असम में अब 55,000 प्रशासनिक अधिकारी दावों और आपत्तियों से निपटारे के लिए लगे रहेंगे. दावों और आपत्तियों, नोटिस और सुनवाई जारी करने के चरण के दौरान पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि अधिकारियों द्वारा उचित परीक्षण किया जा सके.

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इसमें कहा गया है कि सुनवाई के दौरान असम सरकार ने कहा था कि भारत के विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के सहयोग से एनआरसी के सभी आवेदकों के बॉयोमीट्रिक नामांकन की प्रक्रिया चलेगी. दावेदारों को उनके दावे को साबित करने के लिए सुनवाई में शामिल होने के सबूत लाने की आवश्यकता होगी. वे उनके साथ ऐसे अन्य व्यक्तियों को भी लाएंगे, जिनके मौखिक साक्ष्य उन्हें प्रमाणित करने के लिए स्वीकार्य हैं.

इसमें कहा गया है कि शामिल करने या बहिष्कार का अंतिम निर्णय उन अधिकारियों द्वारा लिया जाएगा जो मुहर और हस्ताक्षर के तहत एक आदेश को रिकॉर्ड करेंगे. दावा करने वाले  व्यक्तियों के संबंध में बॉयोमीट्रिक नामांकन विशिष्ट होगा और अलग आईडी तैयार की जाएगी. एक बार अंतिम एनआरसी प्रकाशित होने के बाद एनआरसी में शामिल ऐसे व्यक्तियों को देश के कानूनी निवासियों के लिए लागू आधार नंबर दिया  जाएगा. यदि किसी व्यक्ति के पास पहले से आधार नंबर है जो दावे का हिस्सा भी है तो उसके आधार नंबर को प्राप्त किया जाएगा.

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एनआरसी मामले में सुप्रीम कोर्ट 16 अगस्त को सुनवाई करेगा.


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