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उन्नाव बलात्कार मामला : DCW ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

कोर्ट से अभियुक्त विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को तुरंत गिरफ्तार करने, मामले में फास्ट ट्रैक ट्रायल छह माह में पूरा करने का निवेदन

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उन्नाव बलात्कार मामला : DCW ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखा पत्र

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उन्नाव बलात्कार मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है.

खास बातें

  1. विधायक की शह पर पीड़ित के परिवार को प्रताड़ित कर रही पुलिस
  2. पुलिस हिरासत में कथित पिटाई से पीड़ित के पिता की मौत
  3. बलात्कार की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली है मगर उसमें विधायक का नाम नहीं
नई दिल्ली: दिल्ली महिला आयोग ने उन्नाव बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखा है. पत्र में विधायक द्वारा नाबालिग का बलात्कार करने और पुलिस हिरासत में पीड़ित के पिता की मौत का मुद्दा उठाया गया है. अभियुक्त विधायक को तुरंत गिरफ्तार करने और मामले में फास्ट ट्रैक ट्रायल छह माह में पूरा करने का निवेदन किया गया है.

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि पीड़ित पिछले एक साल से लगातार विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ बलात्कार की एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही है, मगर पुलिस उसके अधिकारों का संरक्षण करने और विधायक के खिलाफ मामला दर्ज करने में असफल रही है. उल्टा उसके परिवार को विधायक की शह पर पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है और धमकाया जा रहा है. इससे परेशान होकर पीड़ित और उसके परिवार ने मुख्यमंत्री के घर के सामने आत्महत्या करने की कोशिश की. उनकी सहायता करने की जगह उसके पिता को ही हिरासत में ले लिया गया और पुलिस हिरासत में कथित रूप से पिटाई करने की वजह से उनकी मौत हो गई.

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पत्र में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि उनके शरीर पर 18 गंभीर चोटों के निशान थे और आंत फटने से उनकी मौत हो गई, जो पुलिस हिरासत में उन पर किए गए अत्याचारों की तस्दीक करती है.

उन्होंने लिखा है कि बढ़ते दबाव की वजह से पुलिस ने बलात्कार की रिपोर्ट तो दर्ज कर ली है मगर उसमें विधायक का नाम नहीं है. इस वजह से वह अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ है और लगातार मीडिया में बयान देकर पीड़ित के चरित्र का हनन कर रहा है.

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मालीवाल ने कहा है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित और उसका परिवार डर की वजह से अपने गांव नहीं लौट पा रहे हैं.उन्होंने लिखा है कि दर्ज की गई एफआईआर में काफी गड़बड़ियां हैं. कानून के अनुसार एफआईआर में पीड़ित की पूरी शिकायत होनी चाहिए, मगर इस केस में एफआईआर का विवरण शिकायत से बिलकुल अलग है. भारतीय दंड संहिता, सीआरपीसी , पोक्सो और उच्चतम न्यायलय के निर्देशों के अनुसार अभियुक्त को तुरंत पुलिस हिरासत में लेना चाहिए और 24 घंटे के अंदर पीड़ित के बयान लेने चाहिए, मगर इस मामले में सभी नियमों का उल्लंघन किया गया है.उन्होंने कहा है कि इस मामले में प्रदेश के शासन और पुलिस की अपराधियों से मिलीभगत साफ दिखती है.

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उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से प्रार्थना की है कि अभियुक्त विधायक को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और इस मामले में फास्ट ट्रैक ट्रायल हो जो 6 महीने में पूरा हो. साथ ही इस मामले में पुलिस और प्रशासन की संलिप्तता की न्यायिक जांच हो. पीड़ित और उसके परिवार को तुरंत सुरक्षा और सहायता प्रदान की जाए.


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