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इस बार क्या कहते हैं राज्यों के समीकरण, 2014 में तो 'मोदी लहर' ने झोली भरकर दी थी सीटें

विपक्षी दलों को लगता था कि हो सकता है कि बीजेपी पीएम मोदी को आगे कर जिन राज्यों में बीजेपी की सरकारें वहां पर सत्ता विरोधी लहर को कम कर ले जाने में कामयाब हो जाए.

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इस बार क्या कहते हैं राज्यों के समीकरण, 2014 में तो 'मोदी लहर' ने झोली भरकर दी थी सीटें

इस बार कई राज्यों में समीकरण बदले हुए नजर आ रहे हैं

खास बातें

  1. इस साल कई राज्यों में हैं विधानसभा चुनाव
  2. इन राज्यों में है बीजेपी की सरकार
  3. सत्ता विरोधी लहर बन सकती है बीजेपी के लिए मुश्किल
नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली  ने साफ कर दिया है कि जल्द लोकसभा चुनाव की संभावना नहीं है. लेकिन इससे पहले कयास लगने शुरू हो गए थे कि शायद बीजेपी जल्द चुनाव का फैसला ले सकती है. इसकी एक वजह यह भी थी कि पीएम मोदी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की वकालत कर रहे थे और इसी साल आखिरी में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने थे. हालांकि विपक्षी दल और एनडीए में शामिल नीतीश कुमार इसके पक्ष में नहीं थे. दरअसल विपक्षी दलों के विरोध के पीछे एक वजह हाल ही में आए कुछ चुनावी सर्वे भी हो सकते हैं. इनमें पीएम मोदी की लोकप्रियता में कोई खास कमी नहीं आंकी गई है. विपक्षी दलों को लगता था कि हो सकता है कि बीजेपी पीएम मोदी को आगे कर जिन राज्यों में बीजेपी की सरकारें है वहां पर सत्ता विरोधी लहर को कम कर ले जाने में कामयाब हो जाए. इन राज्यों में राजस्थान, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, और छत्तीसगढ़ हैं. ये वही राज्य हैं जहां बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता हासिल की थी. इसमें हरियाणा और असम ऐसे राज्य है जहां पर लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव हुए थे और यहां भी बीजेपी ने बहुमत हासिल किया था. अगर मौजूदा हालत की बात करें तो बीजेपी और बाकी दलों के लिए समीकरण कुछ बदले से नजर आते हैं.

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गुजरात : लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस राज्य में सभी 26 सीटें जीती थीं. लेकिन हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बड़ी मुश्किल से जीत हासिल की है. विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि ग्राउंड पर बीजेपी की पकड़ कम हुई है और इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम हो सकती हैं. अब यह मौजूदा सीएम विजय रुपाणी सरकार के कामकाज पर भी तय करेगा. इसके साथ ही मोदी सरकार के 'गरीबों और किसानों' के लिए पेश किए गए बजट का भी प्रभाव तय करेगा.

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राजस्थान : इस राज्य में भी बीजेपी ने 25 में से सभी सीटें जीत ली थीं. लेकिन हाल ही में 2 लोकसभा और एक विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है. माना जा रहा है कि राज्य में वसुंधरा राजे की सरकार के कामकाज से लोग खुश नहीं है. हालांकि वसुंधरा राजे सरकार ने बजट में किसानों के 50 हजार तक का कर्ज माफ कर दिया है. लेकिन फिर भी बीजेपी इस बार भी सभी सीटें जीत ले जाएगी यह मुश्किल ही होगा या फिर इस बार 2014 से बिलकुल उल्टा हालात हो जाएंगे.

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उत्तर प्रदेश : बीजेपी ने यहां पर 80 में से 73 सीटें जीती थीं. विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को यहां पर प्रचंड बहुमत हासिल हुआ है. इस बार भी इस राज्य के चुनाव में बीएसपी रुख बहुत कुछ तय करेगा. समाजवादी पार्टी ने ऐलान किया है कि वह बीजेपी को हराने के लिए बीएसपी के साथ जाने के लिए तैयार है. वहीं यूपी में राम मंदिर का भी मुद्दा भी गरमा रहा है. दोनों ही समीकरण काफी दिलचस्प हैं.

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बिहार : बिहार में तो राजनीतिक हालत बिलकुल बदल गए हैं. बीजेपी गठबंधन ने जब यहां पर यहां की 40 में से 31 सीटें जीती थीं तब नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. लेकिन अब लालू जेल में हैं और नीतीश कुमार बीजेपी के समर्थन से बिहार में मुख्यमंत्री हैं. वहीं एक सवाल यह भी है कि क्या रामविलास पासवान लोकसभा चुनाव तक एनडीए में बने रहेंगे.

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मध्य प्रदेश : बीजेपी ने यहां पर 29 में से 27 सीटें जीती थीं. इस साल के आखिरी तक यहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं. बीजेपी यहां पर 14 सालों से सत्ता में हैं. यहां के विधानसभा चुनाव के नतीजे लोकसभा चुनाव पर काफी असर डालेंगे. कांग्रेस के सामने दिक्कत ये है कि पार्टी के अंदर ही नेताओं में आपसी खींचतान मची हुई है. तीन बड़े नेता आपस में ही उलझे हुए हैं.

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महाराष्ट्र : महाराष्ट्र की 48 में से 42 सीटें बीजेपी और शिवसेना ने जीती थीं. लेकिन शिवसेना ने ऐलान कर दिया है कि अब वह बीजेपी के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी, तो क्या लोकसभा चुनाव से पहले वह एनडीए से भी अलग हो जाएगी. दूसरा सवाल है कि क्या महाराष्ट्र में एनसीपी अकेले चुनाव लड़ेगी और अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस को मिलाकर चार मोर्चों पर लड़ाई होगी. वहीं मराठा वोट बैंक पर सीएम देवेंद्र फणडनवीस का असर भी देखा जाएगा.  

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छत्तीसगढ़ : 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 11 में से 10 सीटें जीती थीं. इस साल के आखिरी यहां विधानसभा चुनाव होने हैं. रमन सरकार यहां पर इस बार सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही है. लेकिन कांग्रेस के साथ दिक्कत ये है कि उसके कद्दावर नेता और पूर्व सीएम अजीत जोगी ने अलग पार्टी बना ली है और वह किसके वोट काटेगी यह देखने वाली बात होगी.

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झारखंड : बीजेपी ने यहां पर 14 में से 12 सीटें लोकसभा चुनाव में जीती थीं. इस बार यहां पर विपक्षी दलों को फायदा हो सकता है. बीजेपी यहां पर मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ नाराज विधायकों के गुस्से का भी सामना कर रही है. अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और कांग्रेस एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो बीजेपी के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है. 

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असम : इस राज्य में बीजेपी ने 14 में से 7 लोकसभा सीटें जीती थीं. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर अभियान से बीजेपी यहां पर और सीटें बढ़ा सकती है. यहां अभी बीजेपी की ही सरकार है.

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दिल्ली : लोकसभा की सभी सीटें बीजेपी के पास हैं. अगर यहां पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर इसका फायदा बीजेपी को हो सकता है.

हरियाणा : बीजेपी ने यहां की 10 लोकसभा सीटें में से 7 सीटें जीती थीं. लेकिन इस बार मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ गुस्सा देखते हुए कहा जा सकता है कि बीजेपी की सीटें कम हो सकती हैं. लेकिन कांग्रेस यहां पर भी भूपेंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोप से उबर नहीं पाई है. वहीं रणदीप हुड्डा और अशोक तंवर के बीच मनमुटाव भी जगजाहिर है.


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