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झगड़ते वक्‍त अपने पार्टनर से भूलकर भी न कहें ये 7 बातें

किसी भी रिश्‍ते में छोटे-मोटे झगड़े होना आम बात है. कई बार बड़ी लड़ाई भी हो जाती है, लेकिन बात संभालने के ल‍िए झगड़ते वक्‍त भी कुछ बातों का ध्‍यान रखना बेहद जरूरी होता है:

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झगड़ते वक्‍त अपने पार्टनर से भूलकर भी न कहें ये 7 बातें

लड़ाई-झगड़े क‍िसी भी रिलेशनश‍िप का ह‍िस्‍सा होते हैं, लेक‍िन समझदारी से काम लेना जरूरी है

खास बातें

  1. लड़ना-झगड़ना आम बात है लेक‍िन पार्टनर को बेइज्‍जत करना बिलकुल गलत
  2. चाहे कितना भी बड़ा झगड़ा हो कुछ बातों के हमेशा ध्‍यान में रखना चाहिए
  3. झगड़ते वक्‍त कभी भी अपने पार्टनर से ये 7 बातें नहीं करनी चाहिए
नई द‍िल्‍ली : छोटी-मोटी नोंक-झोंक या कभी-कभी बड़ी लड़ाई, किसी भी रिश्‍ते में इन बातों का होना लाजिमी और स्‍वाभाविक है. पार्टनर के साथ कुछ समय गुजारने के बाद आपको इस बात का अंदाजा हो ही जाता है कि झगड़े के वक्‍त क्‍या कहना सही है और किस बात को बिलकुल भी नहीं कहना है. झगड़ते वक्‍त कड़वी बातों को कहना बेहद आसान हो जाता है लेकिन ज़रा सोचिए कि यही बातें अगर आपसे कहीं गईं होती तो आप कैसा महसूस करते. यहां पर हम आपको ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बता रहे हैं जिन्‍हें लड़ते वक्‍त भी आपको अपने पार्टनर से नहीं कहनी चाहिए: 

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1. 'तुम किसी काम के नहीं हो'
रिलेशनश‍िप में अगर आप ऐसे प्‍वॉइंट में पहुंच जाएं जहां आप अपने पार्टनर की इंसल्‍ट करने लगे तो ज़रा संभल जाइए. ये वो समय है जब आपको थोड़ा रुककर गहरी सांस लेनी चाहिए और सिचुएशन से निपटने के बारे में सोचना चाहिए न कि उसे बिगाड़ने के बारे में. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप यह मानते हैं कि सामने वाले के साथ ये सब होना ठीक है या नहीं. बस इस बात का ध्‍यान रख‍िए कि ऐसी कड़वी बात बोलनी ही क्‍यों जिससे कि आपका पार्टनर बुरी तरह टूट जाए या आत्‍म ग्‍लानि में घुटता रहे. यह कौन तय करेगा कि कितनी इंसल्‍ट करना ठीक है? कुछ भी हो, कितना भी बड़ा झगड़ा हो हमेशा एक-दूसरे के ल‍िए रिसपेक्‍ट होना बहुत जरूरी है. 

2. 'हमें ब्रेक-अप कर लेना चाहिए' 
जब दिल दुखता है तब आपके मन में ढेरों बातें घूम रही होती हैं और इस दौरान कोई भी बड़ा फैसला लेना हमेशा गलत साबित होगा. अगर आप यह सोच रहे हों कि रिलेशनश‍िप किस द‍िशा में जा रहा है तो भी झगड़े के बीच में ब्रेक-अप की बात करना नासमझी है. याद रख‍िए कि इस तरह ब्रेक-अप की बात करना हमेशा-हमेशा के लिए आपके रिश्‍ते को खत्‍म कर देगा. आपका पार्टनर भी आप पर भरोसा नहीं करेगा क्‍योंकि इससे उसे ऐसा लगेगा कि थोड़ी-बहुत दिक्‍कत आने पर आप भाग खड़े होने वालों में से हैं. 

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3. 'तुम हमेशा ऐसा करते/करती हो'
यूं तो हर बार झगड़े का मुद्दा अलग-अलग होता है. झगड़े के वक्‍त पुरानी बातों को लेकर बैठ जाना बहुत ही गलत है. वो भी ऐसी बातें जिन्‍हें आप पहले ही सुलझा चुके हैं उन पर फिर से बहस करना बेवकूफी की सबसे बड़ी न‍िशानी है. याद रख‍िए अगर आपका मकसद झगड़ा सुलझाकर आगे बढ़ने का है तो इस तरह गड़े मुर्दे उखाड़कर आपको कुछ भी हासिल नहीं होगा. 

4. 'तुम नहीं समझोगे/समझोगी' 
इस तरह की बात कहने का मतलब है कि आप पूरी तरह से अपने पार्टनर के अस्तित्‍व को नकार रहे हैं और उन्‍हें इस बात का एहसास दिला रहे हैं कि वो किसी काम के नहीं हैं. झगड़े के वक्‍त बार-बार तुम नहीं समझोगे/समझोगी कहकर आप अपने पार्टनर को बिना कोश‍िश किए ही हार मानने के लिए मजबूर कर देंगे. 

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5. 'तुम इस बात का बतंगड़ क्‍यों बना रहे/रही हो' 
अगर आप अपने पार्टनर की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो इससे उन्‍हें लगता है कि आप उन्‍हें समझने की हो कोश‍िश नहीं कर रहे हैं. साथ ही पार्टनर यह भी सोचने लगता है कि इस तरह भावनाओं के जाह‍िर करना या महसूस करना सही नहीं है. लेकिन याद रख‍िए कि किसी भी रिश्‍ते में भले ही वो कितना ही कैजुअल क्‍यों न हो सभी को दुखी होने का पूरा हक है. अगर आपको लगता है कि उनके रोने-धोने की वजह बड़ी नहीं है तो भी कम से कम आपको उनकी बात तो सुननी ही चाहिए. कई बार आपका साथी सिर्फ ये चाहता है कि आप बस उसकी बात सुन लें. ऐसे में अपनी राय को किनारे रखकर पार्टनर के नजरिए से चीजों के देखने की कोश‍िश करें. इससे बात को सुलझाने में मदद मिलेगी. 

6. 'तुमसे बात करने का कोई फायदा ही नहीं है'
अगर आप भी कुछ ऐसा ही कहते हैं तो याद रख‍िए कि आप बातचीत से मुंह मोड़ रहे हैं न कि वो. हां, ये अलग बात है कि कुछ लोग जिद्दी होते हैं और उन्‍हें समझाना मुश्किल होता है, लेकिन आपको धैर्य से काम लेना चाहिए. क्‍योंकि सच्‍चाई ये है कि आप और आपका पार्टनर एक दूसरे से लड़ रहे हैं और ऐसे में मुद्दे का समाधान तभी निकल सकता है जब आप बात करेंगे. 

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7. 'तुम अपने एक्‍स के पास वापस क्‍यों नहीं चले जाते/जाती?'
झगड़े के दौरान पुराने रिश्‍तों के बारे में बात करना पूरी तरह से गलत है. इस तरह की बात कर के झगड़ा किसी दूसरे डायरेक्‍शन में चला जाएगा और समाधान निकलने के बजाए बात हाथ से निकल जाएगी. आप खुद पर एहसान कीजिए और झगड़े के वक्‍त एक्‍स गर्लफ्रेंड या ब्‍वॉयफ्रेंड की बत भूलकर भी न करें.

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