लापरवाही की वजह से दुनियाभर में 1.9 अरब महिलाएं इस रोग से पीड़ित, जानें कैसे बचें

दुनियाभर में साढ़े तीन अरब से अधिक गुर्दे के मरीज हैं जिनमें महिलाओं की तादाद 1.9 अरब है. उन्होंने बताया ग्रामीण इलाकों में महिलाओं में जागरूकता नहीं होने के कारण गुर्दे की बीमारी का समय पर इलाज नहीं हो पाता है.

लापरवाही की वजह से दुनियाभर में 1.9 अरब महिलाएं इस रोग से पीड़ित, जानें कैसे बचें

पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा गुर्दारोग से पीड़ित : विशेषज्ञ

खास बातें

  • ग्रामीण इलाकों में ज़्यादा महिलाएं पीड़ित
  • जागरूकता की कमी है एक वजह
  • अंग दान से मिल सकती है मदद
नई दिल्ली:

दुनियाभर में गुर्दा संबंधी रोग से पीड़ित मरीजों में महिलाओं की तादाद पुरुषों से कहीं अधिक है, जिसका मुख्य कारण लापरवाही है. विशेषज्ञों ने बताया कि देश के ग्रामीण इलाकों में गुर्दा संबंधी रोगों को लेकर महिलाओं में जागरूकता फैलाने की जरूरत है जिससे वे अपनी हिफाजत कर पाएं और समय पर जांच व इलाज कराएं. 

World Kidney Day: ये 5 फूड आपकी किडनी को रखेंगे हमेशा हेल्दी, रोज़ाना खाएं इन्हें

दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिएलिटी हॉस्पिटल नेफ्रोलोजी व गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सुमन लता नायक ने कहा कि महिलाओं को अपनी जीवन पद्धति को ठीक रखनी चाहिए और गुर्दा संबंधी कोई तकलीफ होने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए. उन्होंने बताया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से गुर्दे की तकलीफें बढ़ती हैं, इसलिए खानपान व आदत में सुधार लाकर इनपर नियंत्रण रखना जरूरी है. 

Conjunctivitis से हो रही है आंखों में जलन और दर्द, तो ऐसे करें बचाव

डॉ. नायक ने बताया कि दुनियाभर में साढ़े तीन अरब से अधिक गुर्दे के मरीज हैं जिनमें महिलाओं की तादाद 1.9 अरब है. उन्होंने बताया ग्रामीण इलाकों में महिलाओं में जागरूकता नहीं होने के कारण गुर्दे की बीमारी का समय पर इलाज नहीं हो पाता है. डॉ. नायक के मुताबिक, महिलाओं में गुर्दे की तकलीफें 14 फीसदी होती हैं तो पुरुषों में 12 फीसदी. इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. 

रहना है हेल्दी तो दूर रहें इन 5 मछलियों से

मूत्रविज्ञान व गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग के सीनियर कंसल्टेंट विकास जैन ने बताया कि गुर्दा खराब होने पर गुर्दे का प्रत्यारोपण ही सही विकल्प है, लेकिन जागरूकता का अभाव होने के कारण गुर्दे की उपलब्धता कम है. उन्होंने कहा, "हमारे पास जो गुर्दा दान करने वाले लोग आ रहे हैं उनमें ज्यादातर अपने परिजनों की जान बचाने के लिए अपना गुर्दा देने वाले लोग हैं. जब तक मृत शरीर से गुर्दे की आपूर्ति नहीं होगी तब तक गुर्दे की जितनी जरूरत है उतनी पूर्ति नहीं हो पाएगी. इसलिए लोग अपने अंग दान करने का संकल्प लें ताकि उनके मरने के बाद उनके अंग किसी के काम आए."

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

मूत्ररोग विशेषज्ञ अनिल गोयल ने कहा कि एक गुर्दा भी पूरी जिंदगी के लिए काफी है, इसलिए लोगों को यह धारणा बदलनी होगी कि उनके एक गुर्दा दान करने से उन्हें आगे तकलीफ हो सकती है. (इनपुट- आईएएनएस)

देखें वीडियो - किडनी से जुड़ी समस्याओं से कैसे बचें