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लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी, नीतीश का पाला बदलना, वोटबैंक का गणित, बिहार में महागठबंधन की राह कठिन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर कुर्सी पर बैठाने के लिए 'मोदी जीताओ' खेमा होगा जिसमें बीजेपी के अलावा नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति होगी पार्टी है.

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लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी, नीतीश का पाला बदलना, वोटबैंक का गणित, बिहार में महागठबंधन की राह कठिन

फाइल फोटो

नई दिल्ली:


लोकसभा चुनाव-2019  को देखते हुए बात अगर बिहार करें तो इस बार राष्ट्रीय जनता दल अपने अध्यक्ष और करिश्माई नेता लालू प्रसाद यादव की गैरमौजूदगी में चुनाव लड़ रही है. सवाल इस बात का है जिस तरह से लालू प्रसाद यादव ने अपने भाषणों के दम पर साल 2014 में शुरू हुई 'मोदी लहर' को एक साल बाद ही बिहार विधानसभा चुनाव में पटरी से उतार दिया था और नीतीश कुमार को सत्ता दिला दी थी. लेकिन इस बार आरजेडी के सामने एक नहीं कई मोर्चों पर चुनौतियां हैं एक तो लालू की गैरमौजूदगी तो दूसरी ओर से  उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बागी तेवर और तीसरा नीतीश कुमार अब बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं.  बात करें बीते लोकसभा चुनाव की तो 21 सीटों पर आरजेडी, 6 सीटों पर बीजेपी, 8 सीटों पर कांग्रेस, 4 सीटों पर जेडीयू, 1 सीट पर एलजेपी दूसरे नंबर रही थी. बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी के वोटबैंक को मिला दें  तो वह महागठबंधन ज्यादा ही  है. लेकिन महागठबंधन के साथ उपेन्द्र कुशवाहा और 'सन ऑफ़ मल्लाह' मुकेश निषाद के आने के बाद मामला दिलचस्प हो गया है. लोकसभा चुनाव में दो खेमों के बीच जंग बहुत ही रोमांचकारी होने वाली है. एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर कुर्सी पर बैठाने के लिए 'मोदी जीताओ' खेमा होगा जिसमें बीजेपी के अलावा नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति होगी पार्टी है. वहीं 'मोदी हटाओ' गुट में आरजेडी, कांग्रेस के अलावा उपेन्द्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, जीतन राम मांझी की 'हम', वामपंथी दल जैसे सीपीआई एमएल, मुकेश साहनी निषाद की वीआईपी पार्टी होगी.  

3 राज्यों में बीजेपी को मिली हार का नीतीश कुमार और रामविलास पासवान ने उठाया जबरदस्त फायदा


लोकसभा चुनाव 2014 के आंकड़े

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तेजस्वी यादव बोले- नीतीश कुमार अवसरवादी, 2019 में एनडीए का बिहार में खाता भी नहीं खुल पाएगा

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2015 में विधानसभा चुनाव के आंकड़े

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विपक्ष का वोट शेयर

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बिहार विधानसभा चुनाव में वोट शेयर

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अगर विधानसभा चुनाव 2015 के वोट शेयर को पैमाना मानें को बीजेपी 24.4, एलजेपी 4.8 और जेडीयू को मिले 16.8 फीसदी वोट शेयर को मिला दें तो बिहार में एनडीए की कुल 46 फीसदी वोटें हो जाती हैं. वहीं अगर हम आरजेडी की 18.4, जीतनराम मांझी की पार्टी हम के 2.3, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी के 2.6 और कांग्रेस के 6.7 वोट शेयर को जोड़े तो वोटों का कुल प्रतिशत 30 है. जो एनडीए के वोट शेयरों से काफी है. हालांकि नीतीश कुमार को अभी सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ेगा. लेकिन इसमें महागठबंधन कितनी वोट खींच पाएगा यह देखने वाली बात होगी. आपको बता दें कि रविवार को ही बिहार में एनडीए की सीटों का समझौता हुआ है. जिसके मुताबिक बीजेपी और आरजेडी 17-17, जबकि एलजेपी को 6 सीटें दी गई हैं. इसके अलावा रामविलास पासवान को एनडीए के कोटे से राज्यसभा भेजा जाएगा. 
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