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प्रियंका गांधी चुनावी रैली में इस्तेमाल कर रहीं कविता और शेर, जानें इसके पीछे की कहानी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आजकल पीएम मोदी पर हमले करने के लिए हिंदी साहित्य और उर्दू अदब से जिन कविताओं और शेरो-शायरी का इस्तेमाल कर रहे हैं...

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प्रियंका गांधी चुनावी रैली में इस्तेमाल कर रहीं कविता और शेर, जानें इसके पीछे की कहानी

प्रियंका गांधी- (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आजकल पीएम मोदी पर हमले करने के लिए हिंदी साहित्य और उर्दू अदब से जिन कविताओं और शेरो-शायरी का इस्तेमाल कर रहे हैं, कभी उन्हें जय प्रकाश नारायण और आरिफ मोहम्मद खान ने उनकी दादी इंदिरा गांधी और उनके पिता राजीव गांधी का विरोध करने के लिए इस्तेमाल किया था. ये कविताएं और शेरो-शायरी उस दौर के राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है. हो सकता है कि प्रियंका को इसका इल्म न हो. मुमकिन है कि उनकी भाषा कोई और लिख रहा हो.

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यूपी के जिस प्रतापगढ़ जिले में पीएम मोदी ने राजीव गांधी को भ्रष्ट कहा था आज वहीं प्रियंका गांधी ने उनके ऊपर उर्दू अदब के मशहूर शेरो से हमला किया. प्रियंका ने शहाब जाफरी का एक शेर पढ़ा कि-


''तू इधर-उधर की न बात कर
ये बता कि काफिला क्यों लुटा?
मैं बताऊं कि काफिला क्यों लुटा?
तेरा रहजनों से वास्ता.
मुझे रहजनों से गिला नहीं,
तेरी रहबरी पे सवाल है''

''पुराने वक्त में अरब के रेगिस्तान में व्यापारियों के काफिले चलते थे. अनजान रेगिस्तानी रास्तों पे रहजन उन्हीं लूट लेते थे. इसलिए हर काफिले के साथ एक रहबर यानी सही रास्ता दिखाने वाला भी चलता था.'' प्रियंका के इस शेर का मतलब है कि पीएम मोदी जो रास्ता दिखाने वाले रहबर के रोल में थे, उन्होंने रहजनों से मिल देश का काफिला लुटवा दिया. लेकिन शायद प्रियंका को ये पता नहीं होगा कि उनके पिता राजीव गांधी ने एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला शहबानो को गुजारा भत्ता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद से पलटवा दिया था. तब उनके कैबिनेट के मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने संसद में उनके पिता राजीव गांधी के खिलाफ अपने भाषा में यही शेर पढ़ के इस्तीफा दे दिया था.

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प्रियंका गांधी ने अभी 7 मई को अंबाला में अपनी रैली में राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर के खंड काव्य 'रश्मिरथी' की कविता 'कृष्णा की चेतावनी' की कुछ पंक्तियां पढ़ी थीं. कविता का प्रसंग ये है कि महाभारत के समय भगवान कृष्ण जब कौरवों को समझाने जाते हैं कि युद्ध न करें तो वे दुर्योधन से भगवान कृष्ण को बांध लेने को कहते हैं. इसका जो जिक्र रामधारी सिंह दिनकर ने किया है वही प्रियंका ने रैली में सुनाया कि-

''जब नाश मनुज पर छाता है,
पहले विवेक मर जाता है.
हरि ने भीषण हुंकार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले,
भगवान कुपित होकर बोले-
‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,
हां, हां दुर्योधन! बांध मुझे''

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ये जानना दिलचस्प होगा कि प्रियंका की दादी इंदिरा गांधी के खिलाफ 25 जून 1975 को दिल्ली की रामलीला मैदान से जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का युद्ध घोष करने के लिए दिनकर की इसी 'कृष्णा की चेतावनी' की दूसरी पंक्तियां ''सिंघासन खाली करो कि जनता आती है'' इस्तेमाल की थीं. हालांकि दिनकर की इस कविता की दो पंक्तियां जो भारतीय राजनीति में बहुत इस्तेमाल होती है, वह है...

''याचना नहीं अब रण होगा,
जीवन जय या कि मरण होगा''

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प्रियंका ने प्रतापगढ़ की रैली में विकास के वादों को झूठा बताने के लिए मशहूर जनवादी कवि आदम गोंडवी की एक कविता की ये पंक्तियां भी इस्तेमाल की.

''तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है.
मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है.''



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