Results 2019: चुनाव हारने के बाद बोलीं डिंपल यादव- मैं विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करती हूं

Loksabha Election Results 2019 यूपी के सबसे बड़े सियासी कुनबे की बहू और पूर्व सीएम अखिलेश यादव की पत्नी ने कहा, 'मैं विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करती हूं और अपनी सेवा का अवसर देने के लिए कन्नौज को धन्यवाद देती हूं.'

Results 2019: चुनाव हारने के बाद बोलीं डिंपल यादव- मैं विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करती हूं

खास बातें

  • यूपी के कन्नौज से डिंपल यादव को मिली हार
  • कहा- मैं विनम्रता से जनादेश को करती हूं स्वीकार
  • राममनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानती हैं डिंपल
नई दिल्ली:

यूपी के कन्नौज से समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली डिंपल यादव (Dimple Yadav) को इस बार हार का सामना करना पड़ा. नतीजे सामने आने के बाद यूपी के सबसे बड़े सियासी कुनबे की इस बहू और पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की पत्नी ने कहा, 'मैं विनम्रता के साथ जनादेश को स्वीकार करती हूं और अपनी सेवा का अवसर देने के लिए कन्नौज को धन्यवाद देती हूं.' उनका सियासी सफर बहुत लंबा नहीं है लेकिन इसमें काफी ट्विस्ट हैं. डिंपल राममनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानती हैं. जब उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा था तो भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इसके बावजूद वह हिम्मत नहीं हारीं और संयम के साथ आगे बढ़ती रहीं. दरअसल 2009 के लोकसभा चुनावों में अखिलेश यादव ने दो सीटों फिरोजाबाद और कन्नौज से चुनाव लड़ा था, इन दोनों ही सीटों पर अखिलेश को जीत मिली थी. जिसके बाद अखिलेश ने फिरोजाबाद सीट छोड़ दी थी और इस सीट से अपनी पत्नी डिंपल यादव को पहली बार चुनाव में उतारा था. सबको उम्मीद थी कि डिंपल यह सीट जीत जाएंगी लेकिन कांग्रेस नेता राजबब्बर ने उन्हें इस सीट से हरा दिया.

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2009 के अपने पहले लोकसभा चुनाव में डिंपल को राजबब्बर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि डिंपल ने हिम्मत नहीं हारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती रहीं. इस बीच जब अखिलेश यादव यूपी के सीएम बने तो उन्होंने अपनी कन्नौज की सीट छोड़ दी जहां 2012 में उपचुनाव हुए. इस सीट से सपा ने डिंपल को चुनाव में उतारा. दिलचस्प यह था कि इस उपचुनाव में बसपा, कांग्रेस और बीजेपी ने उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारा. इसके अलावा दो उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया जिसके बाद डिंपल निर्विरोध सांसद बनीं. हालांकि 2014 में मोदी लहर में भी डिंपल ने अपनी सीट बचा ली. 2019 के लोकसभा चुनावों में डिंपल को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा.

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