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प्रज्ञा ठाकुर को BJP दफ्तर में चार घंटे की 'क्लास', दी गई यह 'नसीहत'

ठाकुर को अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से दो नोटिस मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें जेल में उनके साथ कथित 'अत्याचार' की कहानी बताने की छूट मिली है.

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प्रज्ञा ठाकुर को BJP दफ्तर में चार घंटे की 'क्लास', दी गई यह 'नसीहत'

भोपाल से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर.

भोपाल:

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से भाजपा (BJP) उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर (Pragya Thakur) को उनकी पार्टी ने रविवार को दफ्तर बुलाकर 'भड़काऊ बयान' देने से बचने की नसीहत दी है. सूत्रों के मुताबिक रविवार को प्रज्ञा ठाकुर करीब चार घंटे तक भाजपा दफ्तर थीं. उन्हें कथित तौर पर विवादास्पद बयानों को स्पष्ट करने के लिए कहा गया है. ठाकुर को अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से दो नोटिस मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें जेल में उनके साथ कथित 'अत्याचार' की कहानी बताने की छूट मिली है. 2008 मालेगांव बम विस्फोट (Malegaon Blast 2008) मामले में मुख्य आरोपियों में से एक ठाकुर का मुकाबला कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) से है. भोपाल सीट पर साल 1989 से भारतीय जनता पार्टी जीत दर्ज करती आई है. कईयों ने आरोप लगाया है कि प्रज्ञा ठाकुर को इस सीट से उतारकर भाजपा वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है. 

पिछले सप्ताह भाजपा ज्वाइन करने के साथ ही उन्हें भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद प्रज्ञा ठाकुर विवादित बयान देकर मीडिया की सुर्खियों में आ गई थीं, जिसका काफी विरोध हुआ और उनकी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी. टीवी चैनल टीवी9 को इंटरव्यू देते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने दावा किया था कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने वाले लोगों में वह शामिल थीं, और उन्हें इस पर 'गर्व है.' प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था, 'हमने देश से एक धब्बा मिटा दिया. ढांचा ढहाने के लिए हम लोग गए थे. मैं उस ढांचे पर चढ़ी थी और उसे तोड़ा था. मुझे गर्व है कि भगवान ने मुझे यह मौका दिया. हम लोग वहां पर राम मंदिर बनाएंगे.'


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चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ 'समुदायों के बीच आपसी द्वेष और तनाव पैदा करने' पर नोटिस जारी किया था, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि उनका कहना है कि वह अपने बयान पर अडिग हैं. उन्होंने कहा, 'हां, मैं वहां गई थी. मैंने कल भी यह कहा था, मैं मना नहीं कर रही. मैंने ढांचा ढहाया था. मैं वहां जाऊंगी और राम मंदिर बनाने में मदद करूंगी. हमें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता.'

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इससे पहले उन्होंने कहा था कि उन्होंने 26/11 मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे को 'शाप' दिया था. ठाकुर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, 'मैंने उनसे कहा था कि तुम खत्म हो जाओगे और दो महीने के भीतर ही आतंकियों ने उन्हें मार गिराया.' हेमंत करकरे महाराष्ट्र एटीएस के प्रमुख थे. करकरे साल 2008 मालेगांव विस्फोट मामले के जांच अधिकारियों में शामिल थे. अभी प्रज्ञा ठाकुर जमानत पर बाहर हैं और विस्फोट में मारे गए एक युवक के पिता ने उनकी उम्मीदवारी को कोर्ट में चुनौती दी है. विपक्ष के हमले के बीच भाजपा ने हेमंत करकरे वाले बयान से दूरी बना ली और कहा कि ये उनके (प्रज्ञा ठाकुर) की व्यक्तिगत विचार हैं. 

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रज्ञा ठाकुर को लोकसभा उम्मीदवार बनाए जाने के पार्टी के फैसले का बचाव करते हुए सोमवार को कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और मालेगांव विस्फोट मामले के असली गुनहगार कानून से बच गए. शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह पूरी तरह से सही फैसला है. उनके खिलाफ आरोप निराधार हैं. उनके या स्वामी असीमानंद के खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ है.' उन्होंने दावा किया कि ‘असली गुनाहगारों' को गिरफ्तार करने के बाद छोड़ दिया गया. सवाल होना चाहिए कि उन्हें क्यों छोड़ा गया.

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