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युद्ध हुआ था 200 साल पहले, सालगिरह पर हुई लड़ाई में एक व्यक्ति की मौत

महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसा

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युद्ध हुआ था 200 साल पहले, सालगिरह पर हुई लड़ाई में एक व्यक्ति की मौत

महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200 वीं वर्षगांठ पर हिंसा हुई.

खास बातें

  1. भीमा-कोरेगांव युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा को हराया था
  2. महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की ओर से लड़े थे
  3. दक्षिणपंथी समूहों ने इस ब्रिटिश जीत के जश्न का विरोध किया था
पुणे:

दो सौ साल पहले हुए युद्ध को लेकर दो समूहों में ऐसी लड़ाई हुई कि हिंसा में एक व्यक्ति की जान चली गई. यह घटना सोमवार को महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुई.

पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200 वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सोमवार को हुई हिंसा में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई. भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा की सेना को हराया था.

दलित नेता इस ब्रिटिश जीत का जश्न मनाते हैं. ऐसा समझा जाता है कि तब अछूत समझे जाने वाले महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की ओर से लड़े थे. हालांकि, पुणे में कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने इस ‘ब्रिटिश जीत’ का जश्न मनाए जाने का विरोध किया था.

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पुलिस ने बताया कि जब लोग गांव में युद्ध स्मारक की ओर बढ़ रहे थे तो सोमवार को दोपहर शिरूर तहसील स्थित भीमा कोरेगांव में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं. एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई है. हालांकि, उसकी पहचान और कैसे उसकी मौत हुई इसका अभी ठीक-ठीक पता नहीं चला है.

हिंसा तब शुरू हुई जब एक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हुई. भीमा कोरेगांव की सुरक्षा के लिए तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘बहस के बाद पथराव शुरू हुआ. हिंसा के दौरान कुछ वाहनों और पास में स्थित एक मकान को क्षति पहुंचाई गई.’’ उन्होंने बताया कि पुलिस ने घटना के बाद कुछ समय के लिए पुणे-अहमदनगर राजमार्ग पर यातायात रोक दिया. उन्होंने बताया कि गांव में अब हालात नियंत्रण में है.

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अधिकारी ने बताया, ‘‘राज्य रिजर्व पुलिस बल की कंपनियों समेत और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.’’ उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन नेटवर्क को कुछ समय के लिए अवरुद्ध कर दिया गया ताकि भड़काऊ संदेशों को फैलाने से रोका जा सके.
(इनपुट भाषा से)



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