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राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम : क्या 'भितरघात' ने कांग्रेस को बहुमत से पीछे कर दिया?

सवाल इस बात है कि सत्ता विरोधी लहर के सहारे कांग्रेस जहां बीजेपी का सूपड़ा साफ करने की उम्मीद कर रही थे, फिर ऐसा क्या हो गया कि वह बहुमत से पीछे रह गई. बीजेपी और कांग्रेस की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं है. 

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राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम : क्या 'भितरघात' ने कांग्रेस को बहुमत से पीछे कर दिया?

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सहयोगियों की जरूरत पड़ सकती है. खबर है कि सचिन पायलट 8 निर्दलीयों से संपर्क कर रहे हैं. माना जा रहा है कि सचिन पायलट ही सीएम बनाए जाएंगे. दरअसल, अभी रुझानों की मानें तो कांग्रेस अभी बहुमत के आंकड़े को नहीं छू पाई है. अभी कांग्रेस 100 सीटों को छूने के लिए जद्दोजहद कर रही है. फिलहाल, कांग्रेस राजस्थान में 94 सीटों पर है, वहीं भाजपा 84 सीटों पर है. बता दें कि राजस्थान में 199 सीटों पर मतदान हुए हैं. लेकिन अशोक गहलोत का कहना है कि सीएम पद के लिए नाम पार्टी आलकमान तय करेगा. लेकिन सवाल इस बात है कि सत्ता विरोधी लहर के सहारे कांग्रेस जहां बीजेपी का सूपड़ा साफ करने की उम्मीद कर रही थे, फिर ऐसा क्या हो गया कि वह बहुमत से पीछे रह गई. बीजेपी और कांग्रेस की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं है. 

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सीएम पद के लिए नाम की घोषणा न करना
ऐसा लगता है कि किसी भी तरह की बगावत से बचने के लिए कांग्रेस ने सीएम पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया और पार्टी आलाकमान ने ऐलान कर दिया कि विधायकों की बैठक में दल का नेता चुना गया. इसके बाद से पार्टी दो खेमों में बंट गई और गहलोत और पायलट कैंप ने अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने के लिए जमकक लॉबिंग की फिर चाहे वह जीतने लायक उम्मीदवार रहा हो या नहीं. 

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बीजेपी की ओर से वसुंधरा राजे चेहरा
दूसरी ओर बीजेपी की ओर से सीएम वसुंधरा राजे के रूप में मजबूत चेहरा पेश किया था. सत्ता विरोधी लहर के बावजूद भी वसुंधरा राजे ने पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा और आखिरी तक जीतने का विश्वास जताया.

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क्या पीएम मोदी की रैलियों ने बदली हवा  
एक साल पहले से जो एग्जिट पोल आ रहे थे कि उनसे साफ था कि बीजेपी की बुरी दुर्गति होने वाली है और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान भी ऐसा लग रहा था क्योंकि वसुंधरा सरकार पर गुर्जर आरक्षण आंदोलन से लेकर किसानों के मुद्दे, सीएम की संगठन से दूरी, बड़े नेताओं से मनमुटाव, गैंगेस्टर आनंद के एन्काउंटर और राजपूत सेना के साथ टकराव के चलते राजपूतों से नाराजगी के मुद्दे हावी थे. लेकिन ऐसा लगता है कि पीएम मोदी की रैलियों ने आखिरी तक बीजेपी के पक्ष में हवा बदल दी.

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