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बॉलीवुड में नजर आया #MeToo इफेक्ट, ‘गर्ल गैंग’ ने पुरुषों को यूं दिया जवाब

#MeToo अभियान का रंग बॉलीवुड में भी नजर आने लगा है, बॉलीवुड की महिला सदस्यों ने मिलकर कुछ ऐसा किया है काम...

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बॉलीवुड में नजर आया #MeToo इफेक्ट, ‘गर्ल गैंग’ ने पुरुषों को यूं दिया जवाब

शॉर्ट फिल्म 'काजल' की एक्ट्रेस सलोनी लूथरा

खास बातें

  1. यौन शोषण के खिलाफ है अभियान
  2. बॉलीवुड भी हो गया है एक्टिव
  3. कई एक्ट्रेस कर चुकी हैं सनसनीखेज खुलासे
नई दिल्ली: #MeToo अभियान के तहत दुनिया भर की एक्ट्रेसेस ने अपने साथ हुए यौन शोषण के बारे में खुलकर बात की और अपने साथ दुर्व्यावहार की बात को दुनिया के सामने रखा. हॉलीवुड से शुरू हुई यह अलख बॉलीवुड तक पहुंची और सबने खुलकर अपनी बात रखी. हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइनस्टाइन के खिलाफ यौन शोषण के 50 से ज्यादा आरोप लग चुके हैं. अब बॉलीवुड में #MeToo अभियान का इफेक्ट नजर आने लगा है. शॉर्ट फिल्म ‘काजल’ इसकी ही मिसाल है.

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ये फिल्म पाखी ए. टायरवाला निर्देशित है और इसमें सलोनी लूथरा ने एक्टिंग की है. इस फिल्म की सारी क्रू मेंबर महिलाएं है. ‘काजल’ फिल्म काम करने की जगह और घर पर महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में बताती है. यह फिल्म महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने और लड़ने की कहानी है.

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सलोनी लूथरा बताती हैं, "#MeToo अभियान ने विश्व स्तर पर यौन उत्पीड़न को उजागर करने में मदद की. इसने एक अनोखे तरीके से दुनिया भर की महिलाओं को एक साथ खड़े होने में मदद की. ‘काजल’ #MeToo अभियान से बहुत पहले आई थी और अब मुझे ये एहसास होता है कि यह फिल्म लैंगिक असमानता के बारे में एक मजबूत संदेश देती है. यह समाज को और हमारे आसपास के मर्दों को संवेदनशील बनाने का प्रयास है. मुझे सचमुच लगता है कि इससे बड़ा और तेज बदलाव आएगा. ये बहुत अच्छा होगा जब मर्द अपने आसपास की महिलाओं को लेकर अधिक संवेदनशील होंगे और उनके प्रति सम्मान का भाव रखेंगे. काजल वर्कप्लेस और घर पर रिश्तों की अनकही कहानी की खोज करती है."

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निर्देशक पाखी ए टायरवाला कहती हैं, "काजल के क्रू के लिए हमने सिर्फ महिला सदस्यों का चुनाव किया. मैं हमेशा मानती रही हूं कि सिनेमा का इस्तेमाल दर्शकों को मजबूत संदेश देने के लिए करना चाहिए. इस फिल्म को बनाने के पीछे ये आइडिया था कि लैंगिक असमानता को चित्रित किया जा सके. मैं बहुत खुश हूं कि दर्शक उन भावनाओं को महसूस करने में सक्षम हैं, जो हम उन्हें महसूस कराना चाहते थे. मेरा मानना है कि वास्तविक समानता कानूनों और नियमों से नहीं आएगी. जब महिलाएं खुद के लिए खड़ा होना शुरू करेंगी तभी ऐसा होगा. काजल महिलाओं द्वारा खुद के लिए खड़ा होने की ही कहानी है."

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इस फिल्म ने प्रतिष्ठित रिवर टू रिवर फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म का अवार्ड जीता है. इसे अन्य शीर्ष फिल्म समारोहों जैसे न्यूयॉर्क फिल्म महोत्सव और शिकागो साउथ एशियन फिल्म महोत्सव से स्टैंडिंग ओवेशन मिला है. पाखी टायरवाला निर्देशित 'काजल' अब जियो फिल्मफेयर शॉर्ट फिल्म अवार्ड के बेस्ट शॉर्ट फिल्म कटेगरी के लिए नॉमिनेट हुई है.


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