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केंद्रीय बजट के लिए चुनौती है पानी और सूखे का संकट, इन राज्यों ने मांगा विशेष पैकेज

महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश सूखा और पानी के संकट से निपटने के लिए मांग रहे विशेष पैकेज, दिल्ली सरकार भी चाहती है फंड में बढ़ोत्तरी

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केंद्रीय बजट के लिए चुनौती है पानी और सूखे का संकट, इन राज्यों ने मांगा विशेष पैकेज

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को बजट पेश करेंगी.

नई दिल्ली:

क्या पांच जुलाई के अपने पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल संकट झेल रहे राज्यों के लिए विशेष पैकेज का ऐलान करेंगी? महाराष्ट्र के लिए यह मांग शुरू हो गई है. अलग-अलग राज्यों में सूखे और पानी का संकट दूसरी मोदी सरकार के पहले बजट के लिए भी एक चुनौती है.

महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद माजिद मेमन ने मांग की है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट में सूखे और पानी के संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र को विशेष पैकेज दें.

माजिद मेमन ने कहा कि बजट 2019 में महाराष्ट्र में सूखे के संकट और पानी की कमी की समस्या से निपटने के लिए स्पेशल पैकेज और नई योजनाओं का ऐलान होना चाहिए. मुंबई राज्य को सबसे ज्यादा टैक्स देता है लेकिन वह पानी के संकट से जूझ रहा है.

आंध्रप्रदेश के बड़े जलाशयों में इस बार औसत से 84 फीसदी कम पानी है, जो देश में सबसे कम है. पानी के संकट की वजह से राज्य के किसान गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. राज्य सरकार ने वित्त मंत्री से विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है. आंध प्रदेश सरकार के विशेष प्रतिनिधि विजयसाय रेड्डी ने कहा है कि हम बजट 2019 में आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा चाहते हैं.


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हालांकि सोमवार को ही वित्त मंत्री साफ कर चुकी हैं कि किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव नहीं है. आम आदमी पार्टी ने भी वित्त मंत्री से दिल्ली के लिए ज़्यादा फंड की मांग की है. पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि हमारी मांग है ति दिल्ली के लिए बजट 2019 में फंड बढ़ाया जाए. दिल्ली जितना टैक्स देती है उसके मुकाबले जनता को कुछ भी नहीं मिलता है.

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इस बार बजट ऐसे वक्त पर पेश किया जा रहा है जब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पिछले पांच साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है और और महाराष्ट्र से लेकर तमिलनाडु तक पानी का संकट बना हुआ है. अब देखना होगा कि वित्त मंत्री इन चुनौतियों से निपटने के लिए संसद में पेश होने वाले बजट में क्या रोडमैप पेश करती हैं.



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