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फुलैरा दूज 2018: जानें मुहूर्त, महत्व और क्यों होती है इस दिन ज्यादा शादियां

फुलैरा दूज के दिन गांवों में बच्चे फूलों को तोड़कर घरों में इसकी रंगोली बनाते हैं. इसे घरों में होली रखना भी कहते हैं. यह त्योहार होली का प्रतीक पर्व है.

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फुलैरा दूज 2018: जानें मुहूर्त, महत्व और क्यों होती है इस दिन ज्यादा शादियां

कब मनाई जाएगी फुलैरा दूज (Phulera Dooj), जानें दिन और समय

खास बातें

  1. होली का प्रतीक पर्व है फुलैरा दूज
  2. इस दिन होती है श्रीकृष्ण और राधा की पूजा
  3. फुलैरा दूज को घर में होली रखना भी कहते हैं
नई दिल्ली: हरे-भरे पेड़, उन पर खिलते फूल और लहराते हुए खेत, वसंत पंचमी के महीने का नज़ारा कुछ ऐसा होता है. इसी महीने में आती है फुलैरा दूज. हर साल इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. शहरों में इसका जश्न बेशक ना दिखे लेकिन आज भी गांवों में फुलैरा दूज हर घर में मनाई जाती है, खासकर उत्तर भारत में. इस दिन गांवों में बच्चे फूलों को तोड़कर घरों में इसकी रंगोली बनाते हैं. इसके लिए वो पहले फर्श को गोबर से लेपकर उस जगह को साफ करते हैं और फिर फूलों और रंगों से वहां रंगोली बनाते हैं. यहां जानिए आखिर क्यों मनाई जाती है फुलैरा दूज और क्या है इसका महत्व.

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कब मनाई जाएगी फुलैरा दूज (Phulera Dooj), दिन और समय 
फुलैरा दूज हिंदू कैलेंडर के हिसाब से फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय को मनाई जाती है. साल 2018 में यह 17 फरवरी को मनाई जाएगी. फुलैरा दूज का समय 17 फरवरी दिन 3.56 से शुरू होकर 18 फरवरी शाम 4.50 तक रहेगा. 

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phulera dooj

कैसे मनाई जाती है फुलैरा दूज

क्यों मनाई जाती है (Phulera Dooj)?
फुलैरा दूज को घर में होली रखना भी कहा जाता है. क्योंकि यह वंसत पंचमी और होली के बीच मनाई जाती है. यह पर्व होली आने की खुशी में मनाई जाती है. इसी वजह से फुलैरा दूज के बाद से ही हर दिन घर को फूलों और गुलाल से सजाया जाता है.  इसके साथ यह भी मान्यता है कि फुलैरा दूज को फाल्गुन मास का सबसे शुभ दिन माना जाता है. कहा जाता है इस दिन किसी भी वक्त शुभ काम किए जा सकते हैं. 

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क्या है फुलैरा दूज का महत्व?
फूलों के इस त्योहार के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पूजा की जाती है. खासकर मथुरा और वृंदावन में इस दिन सभी मंदिरों को फूलों से सजाया जाता है और फूलों की होली खेली जाती है. मंदिरों को फूलों से सजाने के अलावा राधे-कृष्ण की मूर्ति को अबीर और गुलाल भी चढ़ाया जाता है. क्योंकि यह फाल्गुन मास का सबसे शुभ दिन माना जाता है इसी वजह से इस दिन सबसे ज़्यादा शादियां होती हैं. ज्योतिषों के अनुसार इस दिन किसी भी मुहूर्त में शादी की जा सकती है. 

कैसे मनाई जाती है फुलैरा दूज?
1. घरों में फूलों और अबीर या गुलाल की रंगोली बनाई जाती है. 
2. इस दिन घरों में भी भगवान कृष्ण और राधा जी की मूर्ति को फूलों से सजाया जाता है. 
3. फुलैरा दूज के दिन पूजा करते वक्त कृष्ण जी को मीठे पकवान का भोग भी लगाया जाता है. 
4. इन्हीं मीठे पकवानों को भगवान को चढ़ाने के बाद भक्तों में बांटा जाता है.  

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