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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सीट के बंटवारे को लेकर बीजेपी और शिवसेना में खींचतान जारी

Maharashtra Elections: बीजेपी -शिवसेना गठबंधन से जुड़े एक सूत्र ने NDTV से कहा कि राज्य में चुनाव से पहले बीजेपी एक बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती है.

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सीट के बंटवारे को लेकर बीजेपी और शिवसेना में खींचतान जारी

महाराष्ट्र में सीट बंटवारे को लेकर कुछ भी साफ नहीं

खास बातें

  1. कुछ महीने बाद ही होने हैं विधानसभा चुनाव
  2. बीजेपी सीटों के 50-50 बंटवारे के फॉर्मूले के पक्ष में नहीं
  3. शिवसेना अकेले लड़ सकती है चुनाव
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) से पहले बीजेपी और शिवसेना के बीच राज्य में सीट बंटवारे को लेकर स्थिति साफ होती नहीं दिख रही है. ऐसे में यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या इस बार दोनों पार्टियां एक गठबंधन के तौर पर ही चुनाव लड़ेंगे या दोनों पार्टियां सभी सीटों पर अपने अलग से उम्मीदवार उतारेगी. बीजेपी -शिवसेना गठबंधन से जुड़े एक सूत्र ने NDTV से कहा कि राज्य में चुनाव से पहले बीजेपी एक बड़े भाई की भूमिका निभाना चाहती है. और अगर ऐसा होता है शिवसेना को आगामी विधानसभा चुनाव में 288 सीटों की विधानसभा में से 120 से ज्यादा सीटें नहीं दी जाएंगी. 

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वहीं, खबर यह भी आ रही है कि शिवसेना इस गठबंधन को तोड़ने पर विचार तो नहीं कर रही है लेकिन वह इस चुनाव में अकेले उतर सकती है. हालांकि  आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी एक सूत्र ने बताया कि अभी तक पर्दे पीछे गठबंधन को लेकर जो भी बात हो रही है उससे इतना तो साफ है कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बार चुनाव में सीटों के 50-50 फीसदी के बंटवारे वाले फॉर्मूले पर सहमत नहीं होंगे. यही वजह है कि कुछ दिन पहले फडणवीस ने इशारों ही इशारों में कहा था कि अभी तक सीट बंटवारे को लेकर कुछ भी तय नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा था कि अगर बीजेपी-शिवसेना को एक गठबंधन के तौर पर लड़ना है तो हमें हमेशा यह ध्यान में रखना होगा कि हमें कुछ मिलेगा और हमें कुछ नहीं मिलेगा. 

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गौरतलब है कि सीट बंटवारे से पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्र सरकार की तारीफ की थी. साथ ही उन्होंने राम मंदिर बनाने की मांग भी की थी. उन्होंने कहा था कि अब राम मंदिर के लिए इंतजार करने का कोई मतलब नहीं बनता है. ठाकरे ने कहा था कि हमनें शिवसेना कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह तैयार रहे हैं. अब समय आ गया है जब राम मंदिर की आधारशिला अयोध्या में रखी जाएगी.  यह वह मुद्दा है जिसे हमारे संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने देखा था. 

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उद्धव ठाकरे ने आगे कहा था  कि जिस तरह से सरकार काम कर रही है, उसने हमारी उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि सरकार जल्द ही अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कराएगी. अब इंतजार करने का कोई मतबल नहीं बनता है. बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर निर्माण को लेकर बीजेपी पर कई बार हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि जिस तरह से मोदी सरकार ने बीते पांच सालों में काम किया है, उससे ऐसा कहीं से भी नहीं लगता है कि वह राम मंदिर बनवाने को लेकर किसी तरह से गंभीर है. 

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आसन्न विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सीटों के बंटवारे पर सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के अपना रुख सख्त करने की खबरों के बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में, दोनों दलों का गठबंधन ‘‘अटल'' है और यह गठबंधन एक बार फिर से सत्ता में वापसी करेगा. मुंबई में एक कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ठाकरे ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री की सराहना की और अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने और समान नागरिक संहिता लाने की अपील की थी.

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ठाकरे ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नेतृत्व और दिशा प्रदान की है जिसमें प्रगति और विकास करने की अपार क्षमता है. संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने और चंद्रयान -2 अभियान के लिए मैं मोदी को बधाई देता हूं ...अब राष्ट्र अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण तथा समान नागरिक संहिता का इंतजार कर रहा है.'' 

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उन्होंने कहा था कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा. पीएम मोदी ने इसे न केवल शब्दों में बल्कि वास्तविकता में सिद्ध कर दिया है.ठाकरे ने कहा था कि महत्वाकांक्षी चंद्रमा मिशन की लिए देश को इसरो के वैज्ञानिकों पर भी गर्व है. भारत में अपार क्षमता है, और मोदी में, देश को (सही) दिशा देने वाला नेतृत्व मिला है. ठाकरे ने यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन जारी रहेगा.



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