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उपचुनावों में हार के बाद सहयोगी दलों से रिश्ते सुधारने की क़वायद, उद्धव ठाकरे से मिलेंगे अमित शाह

शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों में आई खटास के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मिलने की तैयारी में हैं.

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उपचुनावों में हार के बाद सहयोगी दलों से रिश्ते सुधारने की क़वायद, उद्धव ठाकरे से मिलेंगे अमित शाह

फाइल फोटो

खास बातें

  1. यह मुलाकात बुधवार शाम छह बजे उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री में संभव है
  2. दोनों सहयोगियों में हाल के दिनों में काफ़ी तल्ख़ी देखी गई है
  3. पालघर उपचुनाव में दोनों पार्टियां आमने-सामने थीं.
नई दिल्ली: शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों में आई खटास के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से मिलने की तैयारी में हैं. यह मुलाकात बुधवार शाम छह बजे उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री में संभव है. दोनों सहयोगियों में हाल के दिनों में काफ़ी तल्ख़ी देखी गई है. पालघर उपचुनाव में दोनों पार्टियां आमने-सामने थीं.

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यह मुलाकात बीजेपी के महासंपर्क अभियान के तहत मुंबई में होगी. शिवसेना और बीजेपी के तल्ख़ रिश्तों के बीच यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है. बीजेपी शिवसेना ने सात जून को हुए पालघर लोकसभा उपचुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. बिहार में भी एनडीए की बैठक बुलाई गई है और उपचुनावों की हार के बाद सहयोगी दलों से रिश्ते सुधारने की क़वायद है. अमित शाह सात जून को चंडीगढ़ में रहेंगे. वह अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल से मुलाकात करेंगे. संपर्क फ़ॉर समर्थन अभियान के तहत मुलाकात होगी. आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति और राज्य के हालात पर भी चर्चा करेंगे. सहयोगी दलों से मेल-मिलाप का सिलसिला है ताकि उनकी शिकायतों को सुना जा सके.सात जून को पटना में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष नित्यानंद राय ने सभी सहयोगियों को डिनर पर बुलाया है.
 मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर बुलाया गया है.

कहा जा रहा है कि जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो मंत्रिमंडल का विस्तार है वह इस सरकार चौथा और आखिरी विस्तार हो सकता है. पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्यों के सियासी समीकरण और सहयोगियों को साधने के लिए शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है. पार्टी नेताओं का कहना है कि इस संबंध में सहयोगी दलों से भी बातचीत का सिलसिला शुरू किया जाएगा. 

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बता दें कि पिछले साल सितंबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया था. साथ ही एक कैबिनेट रैंक पर सहमति न बनने के कारण शिवसेना की हिस्सेदारी भी मंत्रिमंडल में बढ़ नहीं पाई थी. उस दौरान अन्नाद्रमुक को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने पर चर्चा हुई थी, लेकिन पार्टी में दो धड़ों के बीच मतभेद के चलते इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका था. कहा जा रहा है कि अब संभावित विस्तार में एनडीए के नए साथियों को प्रतिनिधित्व देने और नाराज साथियों को मनाने की कोशिश की जाएगी.

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वहीं इससे पहले रविवार को जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं ने एक बैठक की. इस बैठक में कई मुद्दों पर बात हुई. बैठक के बाद जेडीयू नेता पवन वर्मा ने कहा कि गठबंधन में सभी दलों का सम्मान होना चाहिए. हालांकि उन्होंने ये साफ़ किया कि अभी बीजेपी से इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई है. साथ ही कहा कि बिहार में मुख्यमंत्री और नेता के रूप में एक ही चेहरा है नीतीश कुमार, जिसको नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है. गौरतलब है कि बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं, जिसमें से 22 सीटें बीजेपी के पास हैं. 6 सीटें रामविलास पासवान की पार्टी एलजेपी और 3 सीटें उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास हैं. जबकि जेडीयू के पास सिर्फ़ दो सीटें हैं.

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उधर, कैराना और नूरपुर उपचुनाव में हार के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को पहली बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से दिल्ली में मिले. सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाक़ात में उपचुनाव में हार की वजहों पर चर्चा हुई. सूत्रों के मुताबिक़ अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की मुलाक़ात में सरकार और संगठन में तालमेल की कमी के बीच यूपी कैबिनेट में बदलाव पर भी चर्चा हुई. 2019 के लिए संगठन मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया.

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