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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के सामने एक और संकट

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह असम से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल भी जून में खत्म हो जाएगा. मनमोहन सिंह जैसे नेता जिनको आर्थिक नीति पर विशेषज्ञता हासिल है, का संसद में न रहना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है. असम विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की जो संख्या है उस हिसाब से मनमोहन सिंह की सीट नहीं बचाई जा सकती है.

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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के सामने एक और संकट

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. अब राज्यसभा चुनाव की चुनौती
  2. कांग्रेस से छिन जाएंगी 2 सीटें
  3. मनमोहन सिंह की सीट बच पाना मुश्किल
नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने वाली कांग्रेस के मात्र 52 सांसद ही संसद पहुंचेंगे और उसको नेता विपक्ष का भी दर्जा नहीं मिलेगा. राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़े हुए हैं और अगर वह नहीं मानते हैं तो पार्टी की कमान कौन संभलेगा यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है. इसी बीच मध्य प्रदेश और कर्नाटक की राज्य सरकारों पर संकट मंडराया हुआ है. कर्नाटक  कांग्रेस के नेता केएन रजन्ना  का कहना है कि पीएम मोदी के शपथ लेते ही राज्य सरकार गिर जाएगी. वहीं मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार को समर्थन  दे रहीं बीएसपी की विधायक का आरोप है कि बीजेपी उन्हें 50 करोड़ रुपये का ऑफर दे रही है. पार्टी अभी इन संकटों से जूझ रही है कि उसके आगे हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव भी खड़े हैं. कांग्रेस का अध्यक्ष जो भी बनेगा इन राज्यों में पस्त पड़े कांग्रेस कार्यकर्ताओं में फिर से जान फूंकने की बड़ी चुनौती होगी.  दूसरी ओर कांग्रेस के सामने एक और बड़ा संकट आने वाला है. बीजेपी अगले साल तक राज्यसभा में भी पूर्ण बहुमत पा लेगी इसके बाद उसको अपने एजेंडे को लागू करने में रोकना आसान नहीं होगा.  फिलहाल एनडीए के पास राज्यसभा में 102 सदस्य हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन संप्रग के पास 66 और दोनों गठबंनों से बाहर की पार्टियों के पास 66 सदस्य हैं. एनडीए के खेमे में अगले साल नवंबर तक लगभग 18 सीटें और जुड़ जाएंगी. एनडीए को कुछ नामित, निर्दलीय और असंबद्ध सदस्यों का भी समर्थन मिल सकता है. राज्यसभा में आधी संख्या 123 है, और ऊपरी सदन के सदस्यों का चुनाव राज्य विधानसभा के सदस्य करते हैं. 

यह है सीटों का गणित
अगले साल नवंबर में उत्तर प्रदेश में खाली होने वाली राज्यसभा की 10 में से अधिकांश सीटें भाजपा जीतेगी. इनमें से नौ सीटें विपक्षी दलों के पास हैं. इनमें से छह समाजवादी पार्टी (सपा) के पास, दो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और एक कांग्रेस के पास है. उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा के 309 सदस्य हैं. सपा के 48, बसपा के 19 और कांग्रेस के सात सदस्य हैं. अगले साल तक भाजपा को असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश में सीटें मिलेंगी. भाजपा राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सीटें गंवाएगी. महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव के परिणामों का भी एनडीए की सीट संख्या पर असर होगा. असम की दो सीटों के चुनाव की घोषणा हो चुकी है, जबकि तीन अन्य सीटें राज्य में अगले साल तक खाली हो जाएंगी. बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के पास राज्य विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत है. ऊपरी सदन की लगभग एक-तिहाई सीटें इस साल जून और अगले साल नवंबर में खाली हो जाएंगी.  दो सीटें अगले महीने असम में खाली हो जाएंगी और छह सीटें इस साल जुलाई में तमिलनाडु में खाली हो जाएंगी. उसके बाद अगले साल अप्रैल में 55 सीटें खाली होंगी, पांच जून में, एक जुलाई में और 11 नवंबर में खाली होंगी. 


मनमोहन सिंह का कार्यकाल हो जाएगा खत्म
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  असम से राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल भी जून में खत्म हो जाएगा. मनमोहन सिंह जैसे नेता जिनको आर्थिक नीति पर विशेषज्ञता हासिल है, का संसद में न रहना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है. असम विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की जो संख्या है उस हिसाब से मनमोहन सिंह की सीट नहीं बचाई जा सकती है. राज्यसभा का चुनाव 7 जून का है. इसके अलावा असम  से ही एक और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एस कुजूर भी 14 जून को रिटायर हो रहे हैं. इनकी सीट भी बीजेपी के खाते में जाना तय है.

क्या जेडीएस करेगी कांग्रेस की मदद
अगले साल 22 राज्यों को 72 सीटों पर जब राज्यसभा चुनाव होगा तो कांग्रेस के पास एक मौका होगा कि वह मनमोहन सिंह को राज्यसभा भेज पाए लेकिन उसके लिए उसे कम जेडीएस की मदद चाहिए होगी. लेकिन इसमें भी एक कांग्रेस और जेडीएस को मनमोहन सिंह या एचडी देवगौड़ा में से किसी एक चुनना होगा.

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