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उम्रकैद की सजा मिलने के बाद दुखी था आसाराम, वकीलों से कहा- कुछ करो

जोधपुर कारागार के अधीक्षक विक्रम सिंह ने कहा कि बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद आसाराम काफी दुखी दिख रहा था.

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उम्रकैद की सजा मिलने के बाद दुखी था आसाराम, वकीलों से कहा- कुछ करो

आसाराम को जोधपुर की कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

खास बातें

  1. उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद आसाराम काफी दुखी दिख रहा था
  2. सुनवाई के दौरान आसाराम वकीलों से फुसफुसाते हुए कह रहा था, ‘कुछ करो’.
  3. फैसला जोधपुर केंद्रीय कारागार में सुनाया गया था
जोधपुर : जोधपुर कारागार के अधीक्षक विक्रम सिंह ने कहा कि बलात्कार के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद आसाराम काफी दुखी दिख रहा था. सिंह के अनुसार 77 साल का स्वयंभू संत सजा की अवधि सुनाए जाने के लिए हो रही सुनवाई के दौरान अपने वकीलों से फुसफुसाते हुए कह रहा था, ‘कुछ करो’. 

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फैसला जोधपुर केंद्रीय कारागार में सुनाया गया. वहां मौजूद पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘फैसला सुनने के बाद आसाराम घबराया सा दिख रहा था. वह दुखी लग रहा था. उसने कहा कि वह ऊपरी अदालत में जाएगा. ’ 

विशेष न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर सेंट्रल जेल में बनी अदालत में आसाराम को बलात्कार का दोषी ठहराने और इस अपराध के लिये उन्हें उम्र कैद की सजा का फैसला सुनाया. 77 साल के आसाराम इसी जेल में चार साल से अधिक समय से बंद हैं.  यह फैसला ऐसे समय आया है जब यौन हिंसा विशेषकर नाबालिगों के बलात्कार के प्रति बढ़ते अपराधों को लेकर देश में बहस चल रही है. पुलिस ने किसी भी तरह की हिंसा और अप्रिय घटना से निपटने के लिए आसाराम के आश्रमों के आस पास की सुरक्षा बढ़ा दी थी. पिछले साल अगस्त में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार का दोषी पाए जाने के बाद उसके समर्थकों ने हिंसा की थी. विशेष अदालत ने दो अन्य आरोपियों को भी दोषी करार दिया जबकि दो अन्य को बरी कर दिया गया.

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लोक अभियोजक पोकर राम बिश्नोई ने कहा कि आसाराम जीवन पर्यंत अर्थात मृत्यु होने तक जेल में रहेगा और अदालत ने उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. उन्होंने कहा कि अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग की थी. उन्होंने कहा, ‘हमने दलील दी कि आसाराम संत नहीं है और उसने साजिश के तहत पीड़िता को छात्रावास से बुलाकर उसका बलात्कार किया.’ बिश्नोई ने कहा, ‘शरद और शिल्पी भी साजिश का हिस्सा थे.’

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भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच सजा पर दलीलें जेल परिसर में दी गईं. राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत को जोधपुर सेंट्रल जेल परिसर में फैसला सुनाने का आदेश दिया था. साबरमती नदी के किनारे एक झोंपड़ी से शुरुआत करने से लेकर देश और दुनियाभर में 400 से अधिक आश्रम बनाने वाले आसाराम ने चार दशक में 10,000 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था. आसाराम और चार अन्य सहआरोपियों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत छह नवंबर 2013 को पुलिस ने आरोपपत्र दायर किया था. पीड़िता ने आसाराम पर उसे जोधपुर के नजदीक मनाई इलाके में आश्रम में बुलाने और 15 अगस्त 2013 की रात उसके साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया था.

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली पीड़िता मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. फैसले के बाद पीड़िता के पिता ने कहा,‘हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और हमें खुशी है कि न्याय मिला.’ उन्होंने कहा कि परिवार लगातार दहशत में जी रहा था और इसका उनके व्यापार पर भी काफी असर पड़ा. फैसले के मद्देनजर जोधपुर जेल के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी जहां पहले से निषेधाज्ञा लागू थी.


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