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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: CBI कोर्ट ने वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को एक जून तक हिरासत में भेजा 

पिछले साल सीबीआई (CBI) द्वारा नरेंद्र दाभोलकर (Dabholkar Murder) की हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपी शरद कलस्कर से पूछताछ में  पता चला था कि जून 2018 में शरद मुंबई में वकील संजीव पुनालेकर के दफ़्तर में जाकर मिला था.

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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: CBI कोर्ट ने वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को एक जून तक हिरासत में भेजा 

दाभोलकर हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट ने आरोपियों को हिरासत में भेजा

मुंबई :

पुणे की विशेष सीबीआई (CBI) कोर्ट ने शनिवार को डॉ.नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड (Dabholkar Murder) मामले में गिरफ्तार सनातन संस्था के वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहयोगी विक्रम भावे को अगले महीने की एक तीरीख तक के लिए सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है. बता दें कि अंध श्रध्दा निर्मूलन समिति के डॉ. नरेंद्र दाभोलकर (Dabholkar Murder) की हत्या साल 2013 में पुणे में की गई थी. पिछले साल सीबीआई (CBI) द्वारा नरेंद्र दाभोलकर (Dabholkar Murder) की हत्या मामले में गिरफ्तार आरोपी शरद कलस्कर से पूछताछ में  पता चला था कि जून 2018 में शरद मुंबई में वकील संजीव पुनालेकर के दफ़्तर में जाकर मिला था.

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तब पुनालेकर ने उसे हत्या में इस्तेमाल की गई बंदूक को नष्ट करने को कहा था. उस समय विक्रम भावे भी दफ़्तर में मौजूद था. उसके बाद ही शरद कलस्कर ने ठाणे से  नालासोपारा जाते समय  खारबाव में पुल से बंदूक के  अलग अलग हिस्से कर फेंक दिया था. सीबीआई के मुताबिक पूछताछ में ये भी पता चला है कि नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के पहले  शूटर सचिन अंदुरे और शरद कलस्कर ने दस दिन पहले रेकी भी की थी.

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आरोप है कि रेकी करने में विक्रम भावे ने मदद की थी. उस दौरान वह वहां साथ गया था. उसी ने हथियार और मोटरसाइकिल मुहैया करने में भी मदद की थी. ध्यान हो कि विक्रम भावे पहले भी एक बम धमाके में आरोपी रहा है. इस बीच सनातन संस्था ने बयान जारी कर सीबीआई पर प्रगतिशील विचार वाले लोगो के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है. सनातन के मुताबिक उनकी संस्था पर पाबंदी के लिये  साजिश रची जा रही है. वहीं, आरोपी वकील संजीव पुनालेकर नाला सोपारा हथियार मामले से लेकर नरेंद्र दाभोलकर , गोविंद पानसरे की हत्या और मालेगांव बम धमाका 2008 के कुछ आरोपियों के भी वकील हैं.

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गौरतलब है कि सीबीआई (CBI) ने पुणे की एक अदालत को बताया कि दाभोलकर की हत्या (Dabholkar Murder) के मामले में शामिल आरोपियों का मकसद सिर्फ आतंक फैलाना था. यही वजह थी कि सीबीआई (CBI) ने आरोपियों के खिलाफ आंतक फैलाने के आरोप दर्ज किए थे. सीबीआई (CBI) ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (यूएपीए) की धाराओं 15 (आतंकी कृत्य) और 16 (आतंकी कृत्य के लिए सजा) लगाने की मांग करते हुये अदालत से दो आरोपियों सचिन एंडुरे और शरद कालस्कर के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने के लिए 90 दिन का समय मांगा. ध्यान हो कि मामले में एंडुरे और शरद कालस्कर समेत गिरफ्तार छह में से पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दायर करने के लिए प्रारंभिक 90 दिन की अवधि 18 नवंबर को समाप्त हो रही है.

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इस मामले में सीबीआई ने 2016 में छठे आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था. एंडुरे और शरद कालस्कर पुणे में 20 अगस्त 2013 को जाने माने अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता दाभोलकर की हत्या करने वाले शूटरों में कथित तौर पर शामिल थे. गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में कहा था कि तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के आरोपियों में एक शरद कलस्कर ने जुलाई में मुम्बई के समीप एक संकरी नदी में चार आग्नेयास्त्र फेंक दिये थे.

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एजेंसी ने दावा किया है कि कलस्कर उन दो व्यक्तियों में एक है जिन्होंने यहां ओंकारेश्वर पुल पर 20 अगस्त, 2013 को दाभोलकर पर गोलियां चलायी थी. उसने अदालत से यह भी कहा कि जब कलस्कर ने इन हथियारों को फेंका था तब उसके साथ वैभव राउत भी था. महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने अगस्त में राउत को हथियारों के जखीरे की बरामदगी के एक मामले में गिरफ्तार किया था. पालघर के नालासोपारा इलाके में एक छापे के दौरान राउत और कलास्कर को एटीएस ने दस अगस्त को गिरफ्तार किया था. जिसके बाद भारी मात्रा में विस्फोटक और आग्नेयास्त्र जब्त किये गये.

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न्यायिक मजिस्ट्रेट एस एम ए सय्याद ने कलस्कर की हिरासत 17 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी. खास बात यह है कि शिवसेना के पूर्व पार्षद श्रीकांत पन्गारकर को महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से नौ और 11 अगस्त के बीच देसी बमों और हथियारों की बरामदगी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.ध्यान हो कि पन्गारकर को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया.

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