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मॉब लिचिंग रोकने के लिए क्या हुए उपाय, सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 9 राज्यों ने दाखिल किया जवाब

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर का गठन किया जा चुका है.

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मॉब लिचिंग रोकने के लिए  क्या हुए उपाय, सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 9 राज्यों ने दाखिल किया जवाब

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो.

खास बातें

  1. मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल
  2. केंद्र और राज्य सरकारों ने बताया-रोकथाम के लिए हुए उपाय
  3. सिर्फ नौ राज्यों ने की रिपोर्ट दाखिल
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा कि मॉब लिंचिंग पर कानून बनाने के लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर का गठन किया जा चुका है.अलवर में रकबर की हत्या के मामले में जवाब-तलब करने पर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन पुलिस वालों का ट्रांसफर करने के साथ एक को निलंबित किया गया है. दोषी अफसरों पर भी कार्रवाई हुई है. सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा कि आरोपियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है.आदेश के क्रम में कुल नौ राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल कर दी है.  जिस पर कोर्ट ने दूसरी राज्य सरकारों से भी एक हफ्ते के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. ऐसा न करने पर राज्यों के  होम सेक्रेटरी को नोटिस दी जारी होगी.
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एक हफ्ते बाद कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा.सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है.पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के प्रिंसिपल सेकेट्ररी होम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.वहीं  मॉब लिंचिंग मामले में उत्तर सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि उन्होंने 17 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया है.
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मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सभी जिलों के SP को नोडल ऑफिसर बनाया गया है. नोडल ऑफिसर टॉस्क फोर्स का गठन किया है जो उन लोगों पर नजर रखेगी जो हिंसा को भड़काते है या अफ़वाह के जरिये माहौल बनाने की कोशिश करते है.नोडल ऑफिसर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ हर महीने में कम से एक बार मीटिंग करेगा.नेशनल हाई वे पर पुलिस की पेट्रोलिंग शुरू की जा जा चुकी है. उन इलाकों में भी पेट्रोलिंग की जा रही है जहाँ लिंचिंग की घटनाएं हुई है.अगर कोई लिंचिंग की घटना में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी और कानून के मुताबिक आगे की करवाई की जाएगी.इतना ही नही पीड़ित के परिवार को पुलिस पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी.दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से हलफनामा दाखिल करने को कहा था कि मॉब लिंचिंग को लेकर जारी गाइडलाइंस पर उन्होंने क्या कदम उठाए हैं.
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