एयर स्ट्राइक के बाद जैश-ए-मोहम्मद कैंप की सैटेलाइट तस्वीरों का ISRO से क्या कनेक्शन है, जानें यहां

रिपोर्ट के मुताबिक बालाकोट में जिस जगह पर हवाई हमला किया गया, वहां अभी भी जैश का मदरसा खड़ा नजर आ रहा है. हालांकि भारतीय वायुसेना का कहना है कि उन्होंने अपने टारगेट को बिल्कुल सटीक तरीके से मार गिराया था.

एयर स्ट्राइक के बाद जैश-ए-मोहम्मद कैंप की सैटेलाइट तस्वीरों का ISRO से क्या कनेक्शन है, जानें यहां

एयर स्ट्राइक के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का कैंप.

नई दिल्ली:

पाकिस्‍तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की ओर से किए गए हमले में जैश-ए-मोहम्‍मद के आतंकी शिविर को ध्‍वस्‍त करने का दावा किया गया है लेकिन इसी बीच रॉयटर्स में छपी एक खबर भारत के दावों का खारिज करती नजर आ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक बालाकोट में जिस जगह पर हवाई हमला किया गया, वहां अभी भी जैश का मदरसा खड़ा नजर आ रहा है. हालांकि भारतीय वायुसेना का कहना है कि उन्होंने अपने टारगेट को बिल्कुल सटीक तरीके से मार गिराया था.  इन तस्वीरों को प्लैनेट लैब्स की ओर से जारी किया गया है जोकि काफी साफ नजर आ रही हैं. यह सैन फ्रांसिस्कों स्थित एक निजी सैटलाइट है. अब आपको इस सैटेलाइट का इसरो से क्या कनेक्शन है यह समझाते हैं. 

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भारतीय हमलों को सवालों के घेरे में खड़ी करने वाली इन तस्वीरों को जिस सैटेलाइट के माध्यम से कैद किया गया है. वह अमेरिकन सैटेलाइट इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेश यानी की इसरो द्वारा ही लॉन्च की गईं थी. प्लैनेट लैब्स द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कई छोटे सैटेलाइटों की लॉन्चिंग भारतीय स्पेसपोर्ट श्रीहरिकोटा से की गई थी. इन सैटेलाइटों की लॉन्चिंग साल 2017 में की गई थी जब भारत ने एक साथ 104 उपग्रहों को लॉन्च करने का रिकॉर्ड बनाया था. अब सवाल पैदा होता है कि भारत के अपने सैटेलाइट कहां हैं. 

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आपको बता दें कि प्लैनेट लैब्स के सैटेलाइट पृथ्वी के 500 किमी के दायरे में घूमते हैं. और पूरी पृथ्वी तस्वीरों का संकलन करते हैं. यह किसी वस्तु की तस्वीरें दैनिक आधार पर एक मीटर से भी कम दायरें में खींच सकते हैं. हालांकि यह तस्वीरें भारत के दावों के उलट बातों की तरफ इशारा करती हैं. चूंकि भारत सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की तस्वीरों को पेश नहीं किया गया है. इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के सिवान ने एनडीवी से बातचीत में कहा है कि भारत के सभी सैटेलाइट सही तरीके से भारतीय सुरक्षा में काम कर रहे हैं. उन्होंने इन सैटेलाइटों की तस्वीरों पर कहा कि इसरो सामान्य तौर पर इन उपग्रहों को डिजाइन करता है और प्रक्षेपण के बाद एजेंसियों को सौंप देता है. उन्होंने बताया कि एक नीति के तौर पर भारत किसी भी नागरिक या सार्वजनिक जगह का एक मीटर रिजॉल्यूशन से कम की तस्वीरों को जारी नहीं करता है. 

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उन्होंने उन उपग्रहों के बारे में बताया जो बालाकोट की हाई रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों को कैद करने की क्षमता रखते हैं. इनमें RADARSATS, कार्टोसैट, माइक्रोसैट-आर और HySis शामिल हैं. उन्होंने बताया कि भारत का बेहतरीन सैटेलाइट RISAT-1, 2017 में खत्म हो गया. इस सैटेलाइट में दिन और रात दोनों ही अवस्थाओं में तस्वीरें कैद करने की क्षमता थी. यह सितंबर 2016 में एक कक्षा में फंस गया था और 2017 में निष्क्रिय हो गया. इसके प्रतिस्थापन का काम चल रहा है जोकि इस साल के आखिर तक खत्म हो जाएगा.