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#MeToo: विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने यौन शोषण के आरोपों के बाद दिया इस्तीफा

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर (MJ Akbar Resigns) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. एमजे अकबर पर 20 महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगयाा था.

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#MeToo: विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने यौन शोषण के आरोपों के बाद दिया इस्तीफा

MJ Akbar: विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

खास बातें

  1. विदेश राज्यमंत्री पद से अकबर का इस्तीफ़ा
  2. मीटू अभियान के तहत अकबर पर लगे आरोप
  3. 20 महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर पर लगाए आरोप
नई दिल्ली: केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने अपने पद से इस्तीफा (MJ Akbar Resigns) दे दिया है. MeToo कैंपेन के तहत यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को अपना इस्तीफा भेज दिया है. बता दें कि अकबर पर 20 महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगयाा था. एजमे अकबर ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि वह न्याय के लिए व्यक्तिगत लड़ाई लड़ते रहेंगे. उन्होंने कहा कि अब वह निजी तौर पर केस लड़ेंगे. उनहोंने पीएम मोदी और सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा भी किया. 

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क्या है मामला
#MeToo अभियान के तहत अभी तक 20 महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर के ऊपर यौन शोषण का आरोप लगाया है. अकबर पर ये सभी मामले 10 से 15 साल पुराने हैं, जब अकबर मीडिया जगत से जुड़े हुए थे. एमजे अकबर ने मामले में सबसे पहले आरोप लगाने वाली प्रिया रमानी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज किया हुआ है, मुकदमा लड़ने के लिए उन्होंने करांजावाला लॉ फर्म की मदद ली है.  

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अकबर ने आपराधिक मानहानि की धारा IPC 499, 500 के तहत प्रिया रमानी के खिलाफ केस दायर किया है. इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर दो साल तक की सज़ा का प्रावधान है. अकबर ने कोर्ट में दिए अपनी याचिका में कहा कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने कल एमजे अकबर से उनके घर जाकर मुलाकात की थी. इसके बाद डोभाल गृह मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिले थे. 

VIDEO : एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया


कौन हैं एमजे अकबर
एमजे अकबर का जन्‍म 11 जनवरी 1951 को हुआ. उनका पूरा नाम मुबशर जावेद अकबर है. जानकारी के मुताबिक उनके दादा रहमतुल्‍ला धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने थे. वह हिंदू थे, लेकिन उनकी शादी मुस्लिम महिला से हुई थी. अकबर की शुरुआती शिक्षा कोलकाता बॉयज स्‍कूल में हुई, इसके बाद उन्‍होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ाई-लिखाई की. 

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एमजे अकबर दुनिया के नामचीन पत्रकारों में शुमार रहे हैं. वह द टेलिग्राफ के संस्थापकों में शामिल रहे हैं. आज भले ही एमजे अकबर बीजेपी में हों, लेकिन कभी कांग्रेस में उनकी अच्छी-खासी पैठ थी. खासकर राजीव गांधी से अच्छी नजदीकी थी और उनके प्रवक्ता भी थे. 1989 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया से सियासत में कदम रखा और बिहार के किशनगंज से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते. 

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राजीव गांधी से नजदीकी की वजह से एमजे अकबर का कांग्रेस में ठीक-ठाक रुतबा था, लेकिन राजीव गांधी की हत्या के बाद वे पार्टी में असहज महसूस करने लगे और राजनीति छोड़ने का निर्णय ले लिया. साल 1992 में वे कांग्रेस छोड़कर वापस पत्रकारिता की दुनिया में लौट आए. 

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एमजे अकबर ने 90 के दशक में अंग्रेजी अखबार 'द एशियन एज' की स्‍थापना की. यह दौर मंदिर-मस्जिद की राजनीति का था और कहा जाता है कि इसी दौर में एमजे अकबर की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से करीबी बढ़ी. दूसरी तरफ, 2004 में कांग्रेस ने सत्‍ता में वापसी की. कहा जाता है कि इसके बाद एमजे अकबर की स्थिति द एशियन एज में कमजोर हुई और उन्हें पद से हटना पड़ा.

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'द एशियन एज' से हटने के बाद एमजे अकबर ने कुछ समय के लिए इंडिया टुडे में काम किया और द संडे गार्जियन नाम का अखबार भी शुरू किया. इस दौरान वह अपना अखबार निकालते रहे. इस दौर में उनकी बीजेपी नेताओं से और नजदीकी बढ़ी. एमजे अकबर ने जवाहर लाल नेहरू की जीवनी 'द मेकिंग ऑफ इंडिया' और 'द सीज विदिन', 'दि शेड ऑफ शोर्ड', 'ए कोहेसिव हिस्टरी ऑफ जिहाद' जैसी किताबें भी लिखी हैं.

राजनीति में फिर हुई वापसी
एमजे अकबर 2014 में नरेंद्र मोदी के करीब आए और एक बार फिर पत्रकारिता को अलविदा कह औपचारिक तौर पर राजनीति ज्वाइन कर ली. बीजेपी ज्‍वाइन करने के बाद अकबर को पार्टी का प्रवक्‍ता बना दिया गया. हालांकि कहा जाता है कि भाजपा के अंदर भी तमाम लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं. 

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शीर्ष नेतृत्व से अच्छे संबंधों की बदौलत एमजे अकबर को 5 जुलाई 2016 को मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री बनाया गया. पहले उन्हें झारखंड से राज्यसभा सदस्य बनाया गया था. इसके बाद दोबारा वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने.
#MeToo के तहत 20 महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं. इन महिला पत्रकारों में एक विदेश महिला पत्रकार भी शामिल हैं. भारी दबाव के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

VIDEO : एमजे अकबर पर लगे आरोप और एमजे की सफाई


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