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दो सौ से अधिक कुलपतियों और शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, विश्वविद्यालयों में हिंसा के लिए इन्हें ठहराया जिम्मेदार

देश भर के 208 वाइस चांसलरों, शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी चिट्ठी, कहा- कैंपसों में हिंसा कर रहे वामपंथी

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दो सौ से अधिक कुलपतियों और शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, विश्वविद्यालयों में हिंसा के लिए इन्हें ठहराया जिम्मेदार

देश भर के 200 से अधिक कुलपतियों और शिक्षाविदों ने पीएम मोदी (PM Modi) को चिट्ठी लिखी है.

खास बातें

  1. पत्र में शिक्षण संस्थानों को अराजकता के माहौल से मुक्ति दिलाने की मांग
  2. पत्र 11 जनवरी को लिखा, कुल 208 कुलपतियों, प्रोफेसरों व शिक्षाविदों के नाम
  3. कहा- शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों को भी असहिष्णुता का सामना करना पड़ रहा
नई दिल्ली:

देश भर के दौ सौ के अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालयों में जोर पकड़ रही वामपंथी राजनीति और हिंसा का विरोध किया है. इन शिक्षाविदों ने पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर उच्च शिक्षण संस्थानों को अराजकता के माहौल से मुक्ति दिलाने की मांग की है. पत्र में आरोप लगाया गया है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU),जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थानों को मुट्ठी भर वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिंसा और अराजकता के माहौल में ढकेल दिया है.

देश के 208 कुलपतियों और शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति के नाम पर लेफ्ट प्रायोजित हिंसा का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि वामपंथी कार्यकर्ताओं की ओर से कैंपस को हिंसा की आग में झोंकने की कोशिश हो रही है. शिक्षाविदों ने यह पत्र 11 जनवरी को लिखा है. पत्र में कुल 208 कुलपतियों, प्रोफेसरों और शिक्षाविदों के नाम हैं.

शिक्षाविदों के इस समूह ने प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) से इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए शैक्षणिक संस्थानों को अराजकता के माहौल से मुक्ति दिलाने की मांग की है. उन्होंने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि जेएनयू, जामिया से लेकर जादवपुर विश्वविद्यालय में मुट्ठी भर वामपंथी कार्यकर्ताओं की ओर से कैंपस में अराजकता का माहौल पैदा करके शैक्षणिक गतिविधियां ठप की जा रही हैं.


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शिक्षाविदों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में वामपंथी कार्यकर्ताओं की अराजक गतिविधियों के कारण पठन-पाठन से लेकर विचारों के आदान-प्रदान के लिए तमाम तरह के कार्यक्रमों के आयोजनों में बाधा पहुंच रही है. जिन कैंपस में वामपंथी संगठनों की पकड़ है, वहां पर विचारधारा थोपने की कोशिश हो रही है. कैंपस को निजी जागीर समझकर व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला हो रहा है. शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों को भी असहिष्णुता का सामना करना पड़ रहा है.

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उन्होंने पत्र में कहा, "विश्वविद्यालयों में लेफ्ट संगठनों की राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान गरीब छात्रों को हो रहा है, जो तमाम मुसीबतों के बीच दूरदराज से पढ़ने के लिए आते हैं. मगर कैंपस में अशांति पैदा करके ऐसे छात्रों के लिए मुश्किलें पैदा की जा रहीं हैं."

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दो सौ शिक्षाविदों के इस समूह ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि इस वक्त जरूरत है कि सभी लोकतांत्रिक ताकतें आगे आकर एकेडमिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में खड़ी होकर आवाज बुलंद करें.

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पत्र लिखने वालों में मध्य प्रदेश के सागर के डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरपी तिवारी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के कुलपति प्रो एचसीएस राठौर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी पंजाब के कुलपति रविंदर, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो रजनीश कुमार शुक्ला प्रमुख रूप से शुमार हैं.

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