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राम मंदिर या इतिहास के मुद्दों से आगे बढ़ना चाहिए, राष्ट्रीय इनोवेशन परिषद बंद होने से निराश हूं : सैम पित्रोदा

गुजरात वाणिज्य एवं उद्योग मंडल में इनोवेशन पर भाषण देते हुए पित्रौदा ने यह भी कहा कि लोगों को राम मंदिर या इतिहास जैसे मुद्दों से आगे बढ़ना चाहिए.

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राम मंदिर या इतिहास के मुद्दों से आगे बढ़ना चाहिए, राष्ट्रीय इनोवेशन परिषद बंद होने से निराश हूं : सैम पित्रोदा

सैम पित्रोदा ( फाइल फोटो )

खास बातें

  1. गुजरात वाणिज्य एवं उद्योग मंडल में दे रहे थे भाषण
  2. शिकागो के इलिनॉय इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के छात्र रहे हैं पित्रोदा
  3. पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है
नई दिल्ली:

दूरसंचार क्षेत्र  के उद्यमी सैम पित्रौदा ने आज कहा कि वह राष्ट्रीय नवप्रवर्तन(इनोवेशन) परिषद को बंद करने के केंद्र के फैसले से निराश हैं. उन्होंने कहा कि ज्यादा रोजगार सृजित करने में इनोवेशन का महत्व समझने के लिए सरकार में ‘मेधा’ का अभाव है. गुजरात वाणिज्य एवं उद्योग मंडल में इनोवेशन पर भाषण देते हुए पित्रौदा ने यह भी कहा कि लोगों को राम मंदिर या इतिहास जैसे मुद्दों से आगे बढ़ना चाहिए.

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उन्होंने कहा, 'नवप्रवर्तन' एक मंच है. आपको सरकार, न्यायपालिका, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रक्रियाओं में इनोवेशन की जरूरत होती है. लेकिन जब मैं भारत में बहस देखता हूं तो यह हमेशा राम मंदिर या इतिहास के बारे में होती है. हर व्यक्ति अतीत की बात करता है. हमें बस अतीत से चिपके रहना पसंद है. :जबकि: हमें आगे बढ़ने की जरूरत है.'


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उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय इनोवेशन परिषद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा एक बहुत बड़ा कदम था. लेकिन इस सरकार ने इसे बंद कर दिया. मैंने सरकार से ऐसा नहीं करने की अपील की लेकिन आखिरकार इसे बंद कर दिया. मुझे निराशा हुई क्योंकि हमें अधिक रोजगार के लिए इनोवेशन की जरूरत है.' 

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आपको बता दें कि सैम पित्रोदा का पूरा नाम सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा है. उन्हें भारत में सूचना क्रांति का जनक मान जाता है. वह यूपीए सरकार के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री सैम पित्रोदा के जन सूचना संरचना और नवप्रवर्तन सलाहकार रह चुके हैं.  साल 2005 से 2009 तक सैम पित्रोदा भारतीय ज्ञान आयोग के चेयरमैन थे. 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के आमंत्रण पर उन्होंने दूरसंचार के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए सी-डॉट यानि 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ टेलिमैटिक्स' की स्थापना की थी. उनकी क्षमता से प्रभावित होकर राजीव गांधी ने उन्हें घरेलू और विदेशी दूरसंचार नीति को दिशा देने का काम किया.


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