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कांग्रेस के पूर्व नेता ने अनुच्छेद 370 को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का किया स्वागत

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद में इस पहल (अनुच्छेद 370 को खत्म करना) के पक्ष में मतदान किया न कि इसके विरोध में.

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खास बातें

  1. पूर्व पीएम के समर्थन में आए कांग्रेस नेता
  2. अनुच्छेद 370 को लेकर दिया था पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने बयान
  3. पूर्व पीएम ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व नेता कृपाशंकर सिंह ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के पक्ष में संसद में मतदान किया था. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के तरीके का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संसद में इस पहल (अनुच्छेद 370 को खत्म करना) के पक्ष में मतदान किया न कि इसके विरोध में.

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कांग्रेस का मानना है कि अनुच्छेद 370 अस्थायी प्रावधान है लेकिन अगर बदलाव लाया जाना है तो इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों की इच्छाओं के मुताबिक. मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके कृपाशंकर ने अनुच्छेद 370 हटाने के कदम पर कांग्रेस की मुखालफत के विरोध में पार्टी छोड़ दी थी. उन्होंने यहां एक बयान में मनमोहन सिंह की तारीफ की. उन्होंने कहा कि मैं इस बयान का स्वागत करता हूं कि कांग्रेस धारा 370 रद्द करने के खिलाफ नहीं है. डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने संसद में प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. कृपाशंकर सिंह ने कहा कि कांग्रेस के अन्य प्रमुख सदस्यों को भी विवादास्पद संवैधानिक प्रावधान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
 

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गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Dr Manmohan Singh) ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस सावरकर की विचारधारा के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा था कि सावरकर जी ने जिसे संरक्षण दिया और जिसका समर्थन करते रहे' कांग्रेस उसके पक्ष में नहीं है. डॉ. सिंह (Manmohan Singh) ने कहा था कि इंदिरा गांधी ने बतौर प्रधानमंत्री सावरकर (VD Savarkar) की याद में डाक टिकट जारी किया था. हम सावरकर जी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उस विचारधारा के खिलाफ हैं, जिसके पक्ष में वे (सावरकर) खड़े थे. आपको बता दें कि महाराष्ट्र बीजेपी द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र में सावरकर को भारत रत्न दिये जाने की मांग को उठाने के बाद इस मसले पर सियासी घमासान छिड़ गया है.

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इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि राजग, भाजपा सरकार सावरकर को भारत रत्न क्यों देना चाहती है, गोडसे को क्यों नहीं? गांधी की हत्या में सावरकर पर जहां आरोप पत्र दायर हुआ और बाद में वह बरी हो गए वहीं गोडसे को दोषी ठहराया गया और फांसी पर लटकाया गया. महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अगर आप उनकी याद को मिटाना चाहते हैं तो यह भी कर दीजिए.' 

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वीर सावरकर ने ही 1857 की क्रांति को 'स्वतंत्रता संग्राम' का नाम दिया : अमित शाह

दूसरी तरफ, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 की क्रांति इतिहास में महज विद्रोह के नाम से जानी जाती. वाराणसी में एक कार्यक्रम में शाह ने सावरकर को श्रद्धांजलि देते हुए भारत के दृष्टिकोण से इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल दिया.  शाह ने कहा था कि अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 की क्रांति इतिहास नहीं बन पाती और हम इसे अंग्रेजों की दृष्टि से देखते.' उन्होंने कहा था कि सावरकर ने ही 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को ‘क्रांति' का नाम दिया अन्यथा हमारे बच्चे इसे विद्रोह के नाम से जानते.' 



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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