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अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच खराब होते रिश्ते की बताई वजह, कहा- जब तक पाक आतंकी संगठनों को...

अमेरिका ने कहा कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच 1972 में हुए शिमला समझौते के तहत सीधी बात होती है तो यह दोनों देश आपस के कई मसलों को सरलता के साथ सुलझा सकते हैं.

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अमेरिका ने भारत-पाकिस्तान के बीच खराब होते रिश्ते की बताई वजह, कहा- जब तक पाक आतंकी संगठनों को...

भारत-पाक रिश्ते पर अमेरिका ने दिया बड़ा बयान

खास बातें

  1. अमेरिका ने शिमला समझौता का भी किया जिक्र
  2. कहा- पहले भी दोनों देशों ने कई मसलों को सुलझाया है
  3. आतंकी संगठनों को बताई दोनों देशों के बीच तनाव की वजह
नई दिल्ली:

अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच के रिश्ते को लेकर बड़ा बयान दिया है. अमेरिका ने मंगलवार को कहा कि वह चाहते हैं कि इन दोनों देशों के बीच आपसी बातचीत हो लेकिन पाकिस्तान में पल-बढ़ रहे आतंकी संगठनों की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है. अमेरिका की एक्टिंग असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर साउथ एंड सेंट्रल एशिया एलिस जी वेल्स ने कहा कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच 1972 में हुए शिमला समझौते के तहत सीधी बात होती है तो यह दोनों देश आपस के कई मसलों को सरलता के साथ सुलझा सकते हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने वर्ष 2006-07 में कश्मीर समेत कई अहम मुद्दों को पर्दे के पीछे से हो रही बातचीत के जरिए सुलझाया था. अगर हम इतिहास में देखें तो पता चलेगा कि अगर ये दो देश चाहें तो समस्याएं सुलझ सकती हैं. 

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बता दें कि अमेरिका ने कुछ दिन पहले ही भारत में बड़े आतंकी हमले की आशंका जताई थी. अमेरिका ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान से कई आतंकी संगठन भारत में बड़े हमले की तैयारी में हैं. इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी अफेयर्स के सहायक सचिव रान्डेल श्रीवर ने कहा था कि मुझे लगता है कि कश्मीर को लेकर भारत के निर्णय के बाद सीमा पार से कई बड़े हमले को अंजाम दिया जा सकता है. हालांकि मुझे नहीं लगता कि चीन इस तरह के हमले का समर्थन करेगा या उसे सही बताएगा. बता दें कि रान्डेल श्रीवर ने यह बात क्या चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देगा या नहीं को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही. 

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उधर, पेंटागन द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि वह (चीन) ने पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय मंच पर साध दिया है. क्या कश्मीर के मुद्दे को यूएन में लेकर जाना चाहिए या नहीं इसे लेकर दोनों देश में बात हुई होगी. चीन इसका समर्थन करेगा. लेकिन हमें नहीं लगता कि इससे ज्यादा चीन कुछ भी पाकिस्तान को दे सकता है या देना चाहेगा. हालांकि उन्होंने कहा था कि चीन और पाकिस्तान का रिश्ता काफी पुराना है और दोनों ही देश भारत से सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धा में लगे हैं.

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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) ने कहा था कि पाकिस्तान ने हाल ही में बालाकोट को फिर सक्रिय कर दिया है और करीब 500 घुसपैठिए भारत में घुसने की फिराक में हैं. अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में उन्होंने मीडिया से कहा था कि पाकिस्तान ने हाल ही में बालाकोट को फिर सक्रिय कर दिया है. इससे पता चलता है कि बालाकोट प्रभावित हुआ था. वह क्षतिग्रस्त और नष्ट हुआ था. इसलिए लोग वहां से चले गए थे और अब वह फिर से सक्रिय हो गया है.' उन्होंने कहा कि करीब 500 घुसपैठिए भारत में घुसने की फिराक में है.

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साथ ही जनरल रावत ने कहा था कि आतंकवादियों की हमारे इलाके में घुसपैठ करवाने के लिए पाकिस्तान संघर्षविराम उल्लंघन करता है... हम जानते हैं कि संघर्षविराम उल्लंघन से कैसे निपटना है... हमारी फौज जानती है कि खुद को कैसे पोज़िशन करें, और कैसे कार्रवाई करें... हम सतर्क हैं, और सुनिश्चित करेंगे कि घुसपैठ की ज़्यादा से ज़्यादा कोशिशें नाकाम हों. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि कश्मीर घाटी में आतंकवादियों और पाकिस्तान में बैठे उनके हैंडलरों के बीच कम्युनिकेशन ब्रेकडाउन हुआ है, लेकिन लोगों से लोगों के बीच कोई कम्युनिकेशन ब्रेकडाउन नहीं हुआ है. बता दें, फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ कर्मियों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय वायु सेना ने बालाकोट स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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