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  • किताब की बात: क्या बिहार में मरते रहेंगे बच्चे, बिकती रहेंगी बेटियां?
    बीते साल बिहार में नीतीश कुमार ने खादी के एक मॉल का उद्घाटन किया. इसमें शक नहीं कि खादी बिकनी चाहिए. लेकिन क्या गांधी ने खादी की कल्पना एक ऐसे कपड़े के रूप में की थी जो मॉल में बिके? गांधी की खादी बिक्री के लिए नहीं, बुनकरी के लिए थी, गरीबों के लिए थी. बताने की ज़रूरत नहीं कि गांधी की खादी का यह बाज़ारीकरण दरअसल उस नई सत्ता संस्कृति का द्योतक है जिसके तहत सारा विकास एक ख़ास वर्ग को संबोधित होता है और उसे बाज़ार की कसौटी पर खरा उतरना होता है.
  • हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तानी बच्चे, और हिन्दी की हालत...
    जो बच्चा आज उनतालीस, उनचास, उनसठ, उनत्तर और उनासी के बीच फर्क नहीं समझेगा, उसके लिए आने वाले दिनों में आम देशवासियों से बात करना, और देश के गौरव को समझना क्योंकर मुमकिन होगा... सो, आइए, भाषागत राजनीति में उलझे बिना ऐसे काम करें, जिससे हिन्दी और समृद्ध, और सशक्त हो...
  • हिन्दी दिवस 2020: खेलिए यह हिन्दी क्विज़, और जांचिए, कितनी हिन्दी जानते हैं आप...
    हिन्दी दिवस (14 सितंबर) के अवसर पर हम आपके लिए लाए हैं, हिन्दी के 25 ऐसे शब्द, जिन्हें आमतौर पर, या कहिए, बहुधा गलत वर्तनी (यानी spellings) के साथ लिखा जाता है... सो आप हमें बताइए, इन शब्दों की सही वर्तनी क्या है, क्योंकि इस क्विज़ से इससे न सिर्फ हम जान पाएंगे, हमारे कितने पाठक हिन्दी के कितने अच्छे ज्ञाता हैं, बल्कि आप खुद भी जान पाएंगे, आपका हिन्दी ज्ञान कितना बढ़िया है...
  • पुस्तक समीक्षाः जीवन के साथ विसंगतियों से रू-ब-रू कराती हैं ‘पिघली हुई लड़की’ की कहानियां
    पिघली हुई लड़की कहानी समाज में आए दिन होने वाले एसिड अटैक के मद्देनज़र लिखी गई है. आकांक्षा ने दो किशोरियों के माध्यम से अपनी कहानी कही है.
  • Book Review: डर को हराने का तरीका है एम्ब्रेस योर फीयर
    'डर के आगे जीत है' यह बात आपने खूब सुनी होगी. लेकिन अपने डर को कैसे हराना है इसे बहुत कम ही लोग बाया करते हैं. हाल ही में सारा खान की लिख किताब एम्ब्रेस योर फीयर का विमोचन किया गया.
  • हिंदी का मुकाबला अंग्रेजी से नहीं, खुद हिंदी से ही है: प्रभात रंजन
    आज की हिंदी नई और आत्मविश्वास से भरी हुई दिखाई देती है. पहले अधिकतर लेखक हिंदी विभागों से निकलते थे, आज अलग-अलग पृष्ठभूमियों के लेखक बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं. मुझे यह अधिक उत्साहवर्धक दिखता है कि आज हिंदी किताबों को पढ़ना शर्म की बात नहीं समझी जाती, हिंदी के लेखकों को बहुत जल्दी पहचान मिल जाती है. समाज के अलग अलग तबकों में हिंदी लेखकों को लेकर आकर्षण बढ़ गया है. यह देखकर अच्छा तो लगता ही है. लेकिन एक बात है कि अधिकतर लेखक आज बाज़ार को ध्यान में रखकर लिख रहे हैं, बिक्री के मानकों पर खरा उतरने के लिए लिख रहे हैं.
  • लॉकडाउन में घर में बैठे लोगों के लिए सौरभ शुक्ला जैसे हस्तियों ने फेसबुक लाइव से शेयर किए अपने अनुभव
    कोरोनावायरस के चलते देशभर में 21 दिन का लॉकडाउन देशभर में लागू है. लोग अपने घरों में कैद हैं और सोशल मीडिया का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में सेलेब्स जहां एक ओर सोशल अकाउंट्स के जरिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं तो वहीं लेखक भी इससे इतर नहीं.
  • निर्मल वर्मा की जिंदगी और लेखनी में झांकने की खिड़की है 'संसार में निर्मल वर्मा'
    'ससार में निर्मल वर्मा' में करण थापर से बातचीत के दौरान निर्मल वर्मा अपने जीवन से जुड़ी कई अहम जानकारी देते हैं. जैसे उन्होंने 11 साल की उम्र में पहली कहानी लिखी थी...
  • पुस्तक समीक्षाः तीखे और कसैले हैं 'कबीरा बैठा डिबेट में' के व्यंग्य
    Book Review: 'कबीरा बैठा डिबेट में' (Kabira Baitha Debate Mein) किताब के लेखक पीयूष खुद मीडिया से जुड़े हैं. ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हर चेहरे को उन्होंने बखूबी व्यंग्यों में पेश किया है. कई व्यंग्यों में कबीरदास को टीवी डिबेट का भाग बनाया गया है. और इसके साथ ही साथ कई मीडिया और समाज की विसंगतियों को कहीं तीखे, तो कहीं कसैले तड़के लगाए गए हैं. 
  • 'बदलाव और निरंतरता वाला शहर है दिल्ली'
    दिल्ली भारत की राजधानी के अलावा तेजी से बढ़ता हुआ एक शहर है. इस शहर की अपनी एक संस्कृति है, एक अलग रंग है, एक अलग बनावट है. दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों पर कई किताबे लिखी जा चुकी है. लेकिन पूरे दिल्ली के इतिहास को एक जगह समग्र रुप में नहीं लिखा गया था. दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर डॉ. मनीषा चौधरी ने दिल्ली के इतिहास पर अपनी एक किताब लिखी है(Delhi A History).
  • नाट्य समीक्षा : भारत रंग महोत्सव में आज के हालात का स्वाद देने वाले 'सुदामा के चावल'
    भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता की पौराणिक कथा दोस्ती की मिसाल के रूप में उद्धृत की जाने वाली कहानी है. लेकिन इस सीधी सपाट कहानी में सुदामा के चरित्र का कोई प्रतिपक्ष भी हो सकता है. द्वापर युग के सुदामा के चरित्र की यदि कलयुग की परिस्थितियों में कल्पना की जाए तो उसमें आज की दूषित मानसिकता भी दिखाई दे सकती है. कहानी वही है, चरित्र भी वही हैं लेकिन इन चरित्रों का आचार-विचार वह है जो आज के आम जीवन में देखा जाता है. नाटक 'सुदामा के चावल' में इस पौराणिक कथा की प्रभावी प्रस्तुति हुई. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रतिष्ठित आयोजन 'भारत रंग महोत्सव' के तहत रविवार को दिल्ली के कमानी थिएटर में हुई इस शानदार नाट्य प्रस्तुति का प्रेक्षकों ने जमकर आनंद लिया. प्रस्तुति के दौरान हाल कई बार तालियों और ठहाकों से गूंजा.
  • पद्मश्री से सम्मानित और ‘पहला गिरमिटिया’ के लेखक गिरिराज किशोर का निधन
    गिरिराज का जन्म आठ जुलाई 1937 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फररनगर में हुआ था. उनके पिता ज़मींदार थे. गिरिराज ने कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और स्वतंत्र लेखन किया. वह जुलाई 1966 से 1975 तक कानपुर विश्वविद्यालय में सहायक और उपकुलसचिव के पद पर सेवारत रहे तथा दिसंबर 1975 से 1983 तक आईआईटी कानपुर में कुलसचिव पद की जिम्मेदारी संभाली. राष्ट्रपति द्वारा 23 मार्च 2007 में साहित्य और शिक्षा के लिए गिरिराज किशोर को पद्मश्री पुरस्कार से विभूषित किया गया.
  • इस बार जयपुर में समानांतर साहित्य उत्सव में गांधी और युवाओं पर होंगे विशेष सत्र
    आमतौर पर इसका आयोजन जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल (JLF) के साथ किया जाता है, लेकिन इस बार यह लगभग एक महीने बाद 21 से 23 फरवरी को होगा. इस बार आयोजन स्थल भी रविंद्र मंच के बजाय जवाहर कला केंद्र का शिल्पग्राम होगा. संघ के मुख्य संयोजक ईशमधु तलवार ने बताया कि इस बार PLF में पांच मंचों पर लगभग सौ सत्र तीन दिन में आयोजित किए जाएंगे.
  • किताब-विताब : लोक और भाषा के रस में पगा उपन्यास
    एक रंगकर्मी और रंग निर्देशक के रूप में हृषीकेश सुलभ की पहचान इतनी प्रबल रही है कि इस बात की ओर कम ही ध्यान जाता है कि वे बहुत समर्थ कथाकार भी रहे हैं. उनका नया‌ उपन्यास 'अग्निलीक' हमें मजबूर करता है कि हम उन्हें समकालीन उपन्यासकारों की भी प्रथम पंक्ति में रखें.
  • पुस्तक मेले में सामाजिक कार्यकर्ता व लेखिका शीला डागा की किताब ‘किन्नर गाथा' का लोकार्पण
    प्रगति मैदान में चल रहा विश्व पुस्तक मेला रविवार को समाप्त हो गया. इस बार मेले में तमाम नई किताबें आईं और इन पर चर्चा-परिचर्चा हुई.
  • 'विश्व पुस्तक मेले में पाठकों को देखकर किताबों के प्रति भरोसा मजबूत हुआ'
    प्रगति मैदान में चल रहा विश्व पुस्तक मेला रविवार को समाप्त हो गया. इस बार मेले में तमाम नई किताबें आईं और इन पर चर्चा-परिचर्चा हुई.
  • फैज अहमद फैज की नज्म 'हम देखेंगे' पर हुए विवाद के बाद बढ़ी उनकी किताबों की मांग
    मशहूर पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की मशहूर नज्म 'हम देखेंगे' को लेकर छिड़े विवाद ने भले ही साहित्य जगत में उथल-पुथल मचा दी है, लेकिन इससे युवा पीढ़ी के बीच फैज की किताबों की मांग बढ़ गई है. छात्र और युवा पेशेवरों के बीच फैज की जीवनी और नज्मों को बढ़ने को लेकर खासा उत्साह है और पुस्तक विक्रेता फैज की किताबों की सप्लाई के ऑर्डर कर रहे हैं.
  • किताब अपने आप में एक मुश्किल चीज : कुमार विश्वास 
    प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के आठवें दिन राजकमल प्रकाशन के स्टॉल जलसा घर में कवि कुमार विश्वास ने अपनी किताब फिर मेरी याद पर बातचीत की.
  • पुस्तक मेले में ‘कश्मीर और कश्मीरी पंडित’ और 'माटी मानुष चून' का लोकार्पण
    विश्व पुस्तक मेले के छठवें दिन राजकमल प्रकाशन के ‘जलसाघर' के मंच से अशोक कुमार पांडेय की किताब ‘कश्मीर और कश्मीरी पंडित'का लोकार्पण किया गया. इस किताब में अशोक कुमार पांडेय ने कश्मीर के 1500 साल के कश्मीर के इतिहास और कश्मीरी पंडितों के पलायन को समेटा है.
  • पुस्‍तक विमोचन :  डिप्रेशन की गुत्‍थी खोलकर आत्‍महत्‍या से बचाने वाली किताब है ‘जीवन संवाद’
    अवसाद और आत्महत्या के विरुद्ध वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र की बहुत मशहूर हुई वेबसीरीज 'डियर जिंदगी- जीवन संवाद' किताब की शक्ल में आ गई. रविवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'जीवन संवाद' का लोकार्पण किया गया. किताब की शक्ल में आने से पहले इस वेबसीरीज को एक करोड़ से अधिक बार डिजिटल माध्यम में पढ़ा जा चुका है.
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