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  • गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ
    सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गुसाईं दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने. निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही. उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था. 
  • नेहरू के होने का मतलब
    तथाकथित राष्ट्रवादियों ने नेहरू और गांधी को लगभग खलनायकों में बदलने की कोशिश की है. इनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की जैसे कोई सीमा ही नहीं रही.
  • अलविदा हरिपाल त्‍यागी! शब्‍दों और रंगों के इस जादूगर के बिना फीकी रहेगी कला की दुनिया
    हरिपाल त्‍यागी (Haripal Tyagi) ने 1 मई को इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वह 85 साल के थे और ब्लड कैंसर से लड़ रहे थे.
  • Book Review: एक आईएएस अधिकारी के 38 साल के अनुभवों का दस्तावेज है अनिल स्वरूप की 'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट'
    पूर्व आईएएस अनिल स्वरूप (Anil Swarup) ने अपनी किताब  'नॉट जस्ट ए सिविल सर्वेंट' (Not Just A Civil Servant Book) में 38 साल लंबी प्रशासनिक सेवा के दौरान हुए अनुभवों को व्यक्त किया है. सत्ता और तंत्र को बेहद करीब से देखने वाले अनिल स्वरूप ने इस किताब में अपने अनुभव को शेयर करने के साथ ही कई खुलासे भी किए हैं. इस किताब के तीसरे अध्याय में उन्होंने लिखा है- ''वह अयोध्या में मंदिर चाहते थे और शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण आम सहमति की दिशा में काम कर रहे थे. वह पूरी तरह से आक्रामक तेवर के खिलाफ थे जो धार्मिक संगठनों की पहचान थी. उस समय भारत में मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. दूरदर्शन के अलावा कोई दूसरा न्यूज चैनल नहीं था. टेलीप्रिंटर और लैंडलाइन फोन ही कम्युनिकेशन का साधन थे. लाइव टेलीकास्ट का साधन होने के कारण जमीनी हकीकत का अंदाजा लगाना मुश्किल था. कल्याण सिंह को अयोध्या से रुक-रुक कर जानकारियां मिल रही थी.
  • Ramdhari Singh Dinkar: सत्ता के करीब रहकर भी जनता के दिलों में रहे दिनकर, कुछ ऐसा था उनका जीवन
    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) की आज पुण्यतिथि है. दिनकर (Dinkar) का निधन 24 अप्रैल, 1974 को हुआ था. रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) राष्ट्रकवि होने के साथ ही जनकवि भी थे. दिनकर ऐसे कवियों में से हैं जिनकी कविताएं आम आदमी से लेकर बड़े-बड़े विद्वान पसंद करते हैं. देश की आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी मिलने तक के सफर को दिनकर ने अपनी कविताओं द्वारा व्यक्त किया है.
  • पुस्तक समीक्षा : हवा के ताजे झोंके की तरह है 'भीगी रेत'
    देश के मौजूदा सियासी माहौल में ये पंक्तियां कितनी मौजू हैं. लेखक और समाजसेवी रवि शर्मा का हालिया काव्य संग्रह 'भीगी रेत' ताजा हवा के झोंके की तरह है.
  • हिंदी के प्रख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह का निधन
    हिंदी के विख्यात आलोचक और साहित्यकार नामवर सिंह (Namvar Singh) का निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली. नामवर सिंह 93 वर्ष के थे. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक नामवर सिंह ने मंगलवार की रात 11.51 बजे आखिरी सांस ली.
  • समाज की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराती 'अधूरी दास्तां'
    'अधूरी दास्तां' एक प्रेम कहानी है, जिसे विवेक और साक्षी के बीच बुना गया है. एक ही दफ्तर में काम करने वाले विवेक और साक्षी को प्यार हो जाता है. दोनों तमाम ख़्वाब बुनते हैं, लेकिन उनके ख़्वाब को समाज की नजर लग जाती है.
  • कृष्णा सोबती बहुत याद आएगा आपका जादुई व्यक्तित्व और बेबाकपन
    हिंदी साहित्य (Hindi Literature) में कृष्णा सोबती (Krishna Sobti) एक अलग ही मुकाम रखती थीं और उनका व्यक्तित्व उनकी किताबों जितना ही अनोखा था. 1980 में कृष्णा सोबती को उनकी किताब 'जिंदगीनामा' के लिए साहित्य अकादेमी (Sahitya Akademi Award) से नवाजा गया था तो 2017 में हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें ज्ञानपीठ (Jnanpith) पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
  • शादी के बाद पैदा हुए परस्पर विश्वास और प्रेम की कहानी का लेखा जोखा है ‘सिडक्शन बाय ट्रूथ’
    कहानी के अनुसार शिव एक जाना-माना बुद्धिजीवी होता है. शिव को इस बात का पता है कि इंसान को अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए शादी ही पर्याप्त नहीं है. यही वजह है कि वह मन की जगह तर्क का सहारा लेता है. वह अपनी शादीशुदा जिंदगी के दौरान खुद को व्यभिचार के रास्ते की तरफ अग्रसर करता है. इस दौरान वह दो उद्देश्य तय करता है एक तो यह कि वह शादी के पीछे के मकदस को समझेगा और दूसरा यह कि अपनी इच्छाओं को दोबारा तलाशेगा. ठीक उसी तरह जिस तरह उसकी पत्नी ने किया था. इन दोनों ही उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसने यह फैसला किया था कि वह अब से सिर्फ शादी-शुदा महिलाओं के साथ ही संबंध बनाएगा.
  • Lakshminama Book Review: धर्म, व्यापार और राजनीति का अर्थशास्त्र
    ये बयान तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पुस्तक लक्ष्मीनामा में तमाम कहानियों के साथ पेश किया गया है जो किताब के दो पेज पढ़ने वाले को आगे के पृष्ठ पढ़ने के लिए खुद मजबूर करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इन तीनों विषयों पर अलग-अलग किताबें तो अनेक लिखी गई हैं लेकिन तीनों के अंतर्संबंधों को उजागर करती हुई शायद हिंदी की यह पहली पुस्तक है.
  • प्रेम कथाओं का खूबसूरत संकलन है 'इश्क़ में शहर होना'
    पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में साउथ एशिया स्टडी सर्किल में इस पर बातचीत हुई. इसका पाठ किया. मुंबई में टाटा लिट फेस्ट में कैरोल एंड्राडी ने 'टेक्स्ट एंड द सिटी' के नाम से चर्चा आयोजित की, जो मुझे इस किताब की अब तक की चर्चाओं में सबसे अधिक पसंद हैं.
  • World Book Fair 2019: शनिवार से शुरू होगा विश्व पुस्तक मेला, इस बार पाठकों के लिए खास इंतजाम
    किताबों का महाकुंभ यानी विश्व पुस्तक मेला (World Book Fair 2019) शनिवार से शुरू हो जाएगा. 13 जनवरी तक चलने वाले नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर (NDWBF) का उद्घाटन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे. नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी)  द्वारा आयोजित मेले (Book Fair) की थीम इस बार  'रीडर्स विद स्पेशल नीड्स' रखी गई है, जो खासतौर से विशेष बच्चों पर केंद्रित है.
  • Gopal Das Neeraj: कौन थे गोपालदास नीरज? जानिए उनके बारे में 10 बातें
    हिन्‍दी के मशहूर कवि और साहित्‍यकार गोपालदास सक्‍सेना उर्फ 'नीरज' (Gopal Das Neeraj) की आज जन्मतिथि है. कवि के अलावा गोपालदास नीरज गीतकार भी थे. उन्होंने हिन्‍दी फिल्‍मों के लिए कई गीत लिखें थे. गोपालदास नीरज का जन्‍म (Gopal Das Neeraj Birthday) 4 जनवरी 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गांव में हुआ था. नीरज को लोग आज भी उनके लिखे मशहूर गीतों के लिए याद करते हैं.
  • जब सफ़दर हाशमी को चुकानी पड़ी सच बोलने की कीमत, सरेआम की गई थी हत्या
    सफ़दर हाशमी (Safdar Hashmi) एक नाटककार, निर्देशक, गीतकार और कलाविद थे. सफ़दर हाशमी की आज पुण्यतिथि है. भारत में नुक्कड़ नाटक को आगे बढ़ाने में सफ़दर हाशमी का बेहद खास योगदान रहा है. सफ़दर ने अपने नाटकों के शोषित और वंचित लोगों की आवाज को बुलंद किया था.
  • FlashBack 2018: साल 2018 की वो 5 चर्चित किताबें, जो आपको जरूर पढ़नी चाहिए
    5 Most Popular Books of 2018: साल 2018 किताबों के लिए महत्वपूर्ण रहा. इस साल कहानी, उपन्यास, कविता, कथेतर और तमाम विधाओं में किताबें प्रकाशित हुईं और इन किताबों की खूब चर्चा भी हुई.
  • जेलों में रचनात्मकता पर पहली कॉफी टेबल बुक 'तिनका-तिनका मध्यप्रदेश' का विमोचन
    जेलों में कला, रचनात्मकता और परिवर्तन का संगम है- तिनका-तिनका मध्य प्रदेश. इस किताब का विमोचन सोमवार को गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने किया. जेल सुधारक वर्तिका नन्दा द्वारा लिखित यह पुस्तक 19 लोगों के जरिए जेल की कहानी कहती है.
  • Book Review: पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की वजहों और उनके व्यक्तित्व को खंगालती 'Illiberal India'
    यूं तो गौरी लंकेश और चिदानंद राजघाटा शादी के कुछ सालों बाद ही अलग हो गए थे, लेकिन वे हमेशा अच्छे दोस्त रहे. तलाक के करीब 4 साल बाद चिदानंद राजघाटा अमेरिका बस गए, लेकिन गौरी से बातचीत जारी रही. वह लिखते, 'मैंने कई वर्षों तक फेसबुक पर गौरी के फ्रेंड रिक्वेस्ट को इग्नोर किया,क्योंकि वह बहुत जल्द गुस्सा हो जाती थी. मुझे इससे डर लगता था
  • साहित्य अकादेमी मंगलवार को दिल्ली में आयोजित करेगा मैथिली काव्योत्सव
    राष्ट्रीय राजधानी के मंडी हाउस इलाके में स्थित साहित्य अकादेमी की ओर से रवींद्र भवन के सभागार में 25 सितंबर को अखिल भारतीय मैथिली काव्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन सुबह 10 बजे शाम 6 बजे तक चलेगा. साहित्य अकादेमी की विज्ञप्ति के अनुसार, उद्घाटन सत्र में प्रेम मोहन मिश्र आरंभिक वक्तव्य देंगे.
  • तैमूर के बाद करीना कपूर ने यूं देसी खाने से कम किया वजन, हेल्थ एक्सपर्ट ने खोले राज़
    ऋजुता दिवेकर न्यूट्रिशन एंड एक्सरसाइज एक्सपर्ट हैं, जिन्होंने ना सिर्फ करीना कपूर को एक बार फिर ज़ीरो फिगर लौटाया बल्कि वो आम महिलाओं को भी एक हेल्दी बॉडी बनाने के सीक्रेट्स बताती रहती हैं.
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