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  • गणेश शंकर विद्यार्थी के जीवन के अनसुने पहलुओं को उकेरती किताब ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेश शंकर विद्यार्थी’ का लोकार्पण
    पुस्तक ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेश शंकर विद्यार्थी’ का लोकार्पण शुक्रवार को नई दिल्ली के 10, राजाजी मार्ग पर किया गया. पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को उनके आवास पर लेखक अमित राजपूत ने अपनी किताब की पहली प्रति भेंट की.
  • अंग्रेजी गानों की वजह से सुनने पड़े ताने, लेकिन हर बाधा को पार किया : उषा उथुप
    भारत में पॉप संगीत को एक नया आयाम और नई ऊंचाई देने वालीं जानी-मानी गायिका उषा उथुप की आधिकारिक जीवनी 'उल्लास की नाव' का लोकार्पण मंगलवार की शाम नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया. यह जीवनी विकास कुमार झा ने लिखी है.
  • A Delhi Obsession: जुनून, प्रेम और विश्वास की कहानी है एमजी वसांजी की नई किताब
    कनाडा के उपन्यासकार एमजी वसांजी का उपन्यास 'A Delhi Obsession' दिल्ली के क्लब के शांत वातावरण के बीच, जुनून, प्रेम और विश्वास की एक अप्रत्याशित कहानी को उजागर करता है. यह उपन्यास आपको अपनी गहन दुविधाओं का सामना करने के लिए मजबूर करेगा. यह किताब बेहद संवेदनशील होने के साथ ही पाठकों के नज़रिए को प्रभावित करने वाली है.
  • जानें साहित्य के Nobel Prize से जुड़ीं रोचक और खास बातें...
    सबसे कम उम्र में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले (Nobel Laureate) 41-वर्षीय रुडयार्ड किपलिंग (Rudyard Kipling) थे, जिन्हें 1907 में पुरस्कृत किया गया था, और सबसे बड़ी उम्र में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली लेखिका 88-वर्षीय डोरिस लेसिंग (Doris Lessing) थीं, जिन्हें 2007 में यह पुरस्कार प्रदान किया गया.
  • Munshi Premchand: खुद भी पढ़‍िए और अपने बच्‍चों को भी पढ़ाएं मुंशी प्रेमचंद की ये 5 कहानियां
    हिंदी साहित्य को नई उचाइयों तक पहुंचाने वाले मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि 8 अक्टूबर को मनाई जाती है. साहित्य में प्रेमचंद के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. प्रेमचंद को उपन्यास के सम्राट माने जाते हैं. प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था. प्रेमचंद की कई कहानियां ग्रामीण भारत पर हैं. उन्होंने अपनी कहानियों के माध्यम से किसानों की हालत का वर्णन किया.
  • अल्पना मिश्र: मनुष्यता पर गहराते संकट को बयान करता है 'अस्थि फूल'
    स्त्री-पुरुष के संबंध में बदलाव तो आया है, लेकिन उतना भी नहीं आ पाया. देखने में तो आज स्त्री घर से बाहर निकल रही है. नौकरी कर रही है. पैसा भी कमा रही है, लेकिन उस पैसे पर अभी भी उसका अधिकार नहीं है. अगर वह अपना पैसा खर्च करती है तो उसका हिसाब भी देना होता है. ये जो चीजें हैं ये स्त्री और पुरुष के संबंध में अधिकारों को निर्धारित करती हैं.
  • पुस्तक समीक्षा : RSS के बारे में उठे सवालों के जवाब देती है 'द RSS रोडमैप्स फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी'
    यह पहली बार है, जब RSS के एक वरिष्ठ प्रचारक ने एक पुस्तक के माध्यम से संघ के अंदरूनी क्रियाकलाप, उसकी विचारधारा, भारत के प्रति उसकी दृष्टि तथा विभिन्न विषयों पर सोच को सामने रखने का प्रयास किया है. लंबे समय से संघ के छात्र संगठन ABVP में संगठन महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे सुनील आम्बेकर की पुस्तक – 'द RSS रोडमैप्स फॉर द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी' - उन तमाम विषयों पर संघ की राय स्पष्ट करने का प्रयास करती है, जिन्हें लेकर RSS को कठघरे में खड़ा किया जाता रहा है.
  • जब रामधारी सिंह दिनकर ने कहा- ''अच्छे लगते मार्क्स, किंतु है अधिक प्रेम गांधी से..''
    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar) की आज जयंती है. उनकी जयंती (Ramdhari Singh Dinkar Jayanti) के मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. दिनकर एक ऐसे कवि थे जो सत्ता के करीब रहते हुए भी जनता के दिलों में रहे. देश की आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी मिलने तक के सफर को दिनकर (Dinkar) ने अपनी कविताओं द्वारा व्यक्त किया है.
  • Book Review: 'येरूशलम से कश्मीर तक', ऐतिहासिक तथ्यों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का तारतम्य है यह किताब
    Book Review: ईसा मसीह की भारत यात्रा को पुष्ट करने के लिए योजेफ़ बानाश ने और भी ढेरों प्रतीकों का सहारा लिया है. कथ्य में उन्हें इस तरह पिरोया गया है कि वह सच प्रतीत होते हैं. मसलन किताब के अनुसार ईसा मसीह की गंभीर रोगियों को ठीक कर देने की 'ईश्वरीय' अनुकंपा प्राचीन तक्षशिला विश्वविद्यालय में उपलब्ध चिकित्सा शास्त्र की अनगिनत किताबों की देन थी.
  • किताब छप जाने से कुछ नहीं होता, छपते रहने से होता है : सुरेंद्र मोहन पाठक
    पल्प फिक्शन साहित्य की दुनिया के जाने-माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा ‘हम नहीं चंगे, बुरा न कोय’ का लोकार्पण बुधवार को दिल्ली के त्रिवेणी ऑडिटोरियम में हुआ. लोकार्पण के कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए सुरेन्द्र मोहन पाठक ने कहा, 'किताब छप जाने से कुछ नहीं होता, छपते रहने से होता है. मैं, मेरा ख़ुद का कॉम्पिटिटर हूं. लगातार कोशिश करने से मैंने ये मुक़ाम हासिल किया है.'
  • Book Review: 'बेरंग' जिंदगी के 'रंग' हज़ार, कुछ ऐसी ही है गोर्की-एल्विन की कविता-संग्रह
    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के रहने वाले दो युवा, जिनकी उम्र भले ही ज्यादा नहीं हो लेकिन उन्होंने जीवन के छोटे-बड़े कठिनाइयों से गुजरकर अपने अनुभवों को कविता के माध्यम से पिरोया है. गोर्की सिन्हा और एल्विन दिल्लु ने संयुक्त रूप से कविता संग्रह रची है, जिसका नाम 'रंग बेरंग' है.
  • अनुच्छेद 35A समानता के अधिकार का मौलिक उल्लंघन है: अरुण जेटली
    अनुच्‍छेद 35ए जो कश्‍मीर के निवासियों को विशेष अधिकार देता है, उसे हटाए जाने के कयासों और राज्‍य के राजनीतिक दलों द्वारा ऐसे किसी भी संभावित कदम के कड़े विरोध के बीच सोनिया सिंह की किताब 'डिफाइनिंग इंडिया : थ्रू दीयर आईज' (Defining India: Through Their Eyes) में अरुण जेटली ने स्‍पष्‍ट किया है कि इस विवादास्‍पद अनुच्‍छेद पर बीजेपी सरकार क्‍या सोच रही है.
  • Book Review: खाने से जुड़ी वो 50 आदतें जो आपकी दादी-नानी अपनाती आई हैं, अब जानिए इसके पीछे की सांइस
    ये 50 वही ट्रेडिशनल आदतें हैं जिन्हें आपके घर में दादी या नानी फॉलो करती आ रही हैं, और आपको भी फॉलो करने को कहा होगा. लेकिन मॉर्डन जनरेशन बिना वजह या सच जाने किसी भी आदत को नहीं अपनाती. 
  • पुस्तक समीक्षाः दलित विमर्श को आगे बढ़ाता संवाद है 'ओमप्रकाश वाल्मीकि का अंतिम संवाद'
    पुस्तक समीक्षाः किताब में समाज, जाति और धर्म से जुड़े अनेक प्रासंगिक सवाल हैं जिनका वाल्मीकि ने तार्किक एवं बेबाक जवाब दिया है. दसअसल, यह किताब मात्र संवाद भर नहीं, साहित्य में दलित विमर्श और समाज में दलितोत्थान के प्रयासों का एक पारदर्शी चेहरा है, जिसमें उनकी कमियां एवं अच्छाइयां सब स्पष्ट हो गई हैं.
  • Book Review: बिहार की राजधानी पटना के मज़ेदार किस्से और कहानी, जो हर किसी को नहीं मालूम...मिलेंगे यहां
    पटना, बिहार की राजधानी को अभी तक आपने धूल-मिट्टी और पॉल्यूशन का चश्मा लगाकर देखा होगा. यहां की तंग गलियों और भीड़-भाड़ को देख आपने दूर से ही पटना की छवि उन शहरों की तरह बना ली होगी, जो शहरीकरण और विकास के बीच का सफर तय कर रही है. लेकिन किताब पटना खोया हुआ शहर आपको अलग ही पटना के दर्शन कराएगी.
  • भाजपा की सियासी यात्रा का दस्तावेज है 'बीजेपी : कल, आज और कल'
    वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी की हालिया किताब 'बीजेपी : कल, आज और कल' भाजपा की इसी सियासी यात्रा का दस्तावेज है. उन्होंने अपनी किताब में जनसंघ से लेकर बीजेपी तक की यात्रा का तो विस्तार से वर्णन किया ही है. साथ ही इस यात्रा के हर प्रमुख पड़ाव पर बारीकी से नजर डाली है.
  • केवल पीएम मोदी और सोनिया गांधी ने 'आधार' पर पूछा यह सवाल : नंदन निलेकणि
    एस जयशंकर को सीधे केंद्रीय मंत्री का पद मिला है, ये अपने आप में पहला मौका है लेकिन 10 साल पहले इस तरह कैबिनेट में जगह पाने वाले शख्स नंदन नीलेकणि हो सकते थे. उन्हें राहुल गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्री का पद देने के लिए बुलाया था. हालांकि बिल्कुल आखिरी समय में सोनिया गांधी और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुनर्विचार के बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया जबकि नीलेकणि दिल्ली के लिए उड़ान भरने को बिल्कुल तैयार थे. नीचे दिया गया पुस्तक का अंश पढ़ें...
  • चुनाव प्रचार अभियान में मीडिया की भूमिका की पड़ताल करती 'व्हेन इंडिया वोट्स'
    डॉ. समीर कपूर और प्रो. जयश्री जेठवानी की नई किताब “व्हेन इंडिया वोट्स” में इन सब विषयों का विवेचनात्मक खाका खींचा गया है. लेखकों ने ईमानदारी व बारीकी से लोकतंत्र, प्रचार अभियान व मास मीडिया के अंतर संबंध को समझने में सहायक तथ्यों को प्रस्तुत किया है.
  • गोसाई दत्त यूं बने सुमित्रानंदन पंत, जानिए उनके बारे में सब कुछ
    सुमित्रानंदन पंत की आज जयंती (Sumitranandan Pant Jayant) है. हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत (Sumitranandan Pant) का जन्म 20 मई, 1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था. उनका नाम गुसाईं दत्त था. वह गंगादत्त पंत की आठवीं संतान थे. उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया था. झरना, बर्फ, पुष्प, लता, भ्रमर-गुंजन, उषा-किरण, शीतल पवन, तारों की चुनरी ओढ़े गगन से उतरती संध्या ये सब तो सहज रूप से काव्य का उपादान बने. निसर्ग के उपादानों का प्रतीक व बिम्ब के रूप में प्रयोग उनके काव्य की विशेषता रही. उनका व्यक्तित्व भी आकर्षण का केंद्र बिंदु था. 
  • नेहरू के होने का मतलब
    तथाकथित राष्ट्रवादियों ने नेहरू और गांधी को लगभग खलनायकों में बदलने की कोशिश की है. इनके ख़िलाफ़ दुष्प्रचार की जैसे कोई सीमा ही नहीं रही.
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