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  • Book Review: राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे अटल बिहारी वाजपेयी
    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनीतिज्ञ, कवि और पत्रकार थे. अटल जी राजनेता और कवि दोनों के रूप में आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं. लेकिन अटल जी राजनेता और कवि के साथ-साथ राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष भी थे. राजनेता बनने से पहले अटल जी एक पत्रकार थे. उन्होंने राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने और पत्रकारों की आवाज बुलंद करने में अपना खास योगदान दिया था. अटल जी के जीवन पर कई किताबें लिखी गई हैं. लेकिन आज हम एक ऐसी किताब कि बात कर रहें हैं, जिसमें उनके पत्रकारीय जीवन पर प्रकाश डाला गया है. डॉ. सौरभ मालवीय की किताब ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी’ में अटल जी के पत्रकारीय जीवन के बारें में बखूबी लिखा गया है.
  • हिंदी दिवस 2018 : 1949 में आज ही के दिन मिला था हिंदी को राजभाषा का दर्जा, जानें 10 रोचक तथ्य
    बहुत सी बोलियों और भाषाओं वाले हमारे देश में आजादी के बाद भाषा को लेकर एक बड़ा सवाल आ खड़ा हुआ. आखिरकार 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया. हालांकि शुरू में हिंदी और अंग्रेजी दोनो को को नए राष्ट्र की भाषा चुना गया और संविधान सभा ने देवनागरी लिपि वाली हिंदी के साथ ही अंग्रेजी को भी आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया, लेकिन वह 14 सितंबर 1949 का दिन था, जब संविधान सभा ने हिंदी को ही भारत की राजभाषा घोषित किया.
  • नसीरुद्दीन शाह दिल्ली के उर्दू कवियों पर किताब का विमोचन करेंगे
    राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता नसीरुद्दीन शाह 17 सितम्बर को यहां 'बिलव्ड डेल्ही : ए मुगल सिटी एंड हर ग्रेटेस्ट पोएट्स' किताब का विमोचन करेंगे जिसके लेखक दिल्ली के सैफ महमूद हैं. एक बयान के अनुसार, किताब पर नसीरुद्दीन शाह और गीतकार कौसर मुनीर के बीच चर्चा होगी.
  • अमृता प्रीतम की जिंदगी में खास रही 31 तारीख, प्रेम के लिए तलाशा खुद का ठीहा
    Amrita Pritam: गुजरांवाला पंजाब में आज के ही दिन यानी 31 अगस्त, 1919 में पैदा अमृता प्रीतम का बचपन लाहौर में बीता. सरस्वती की कृपा से उनकी लेखनी किशोर होते होते ही चल पड़ी और अपने जीवनकाल में उन्होंने सौ से ज्यादा कृतियां लिखीं जिनमें कविताएं, कहानियां, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी व उनकी अपनी आत्मकथा रसीदी टिकट प्रमुख हैं.
  • साहित्य अकादमी को हिंदी प्रकाशन के लिए मिला FICCI पुरस्कार
    फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने साहित्य अकादमी को अपना 'बुक ऑफ द ईयर' प्रकाशन पुरस्कार प्रदान किया है. यह पुरस्कार साहित्य अकादमी के शीर्षक 'नागफनी वन का इतिहास' के लिए दिया गया है.
  • 24th Delhi Book Fair: शुरू हुआ दिल्ली बुक फेयर, मिलेगी फ्री एंट्री की सुविधा
    राष्ट्रीय राजधानी स्थित प्रगति मैदान में शनिवार को दिल्ली बुक फेयर शुरू हो गया. केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने बुक फेयर का उद्घाटन किया. फेयर आयोजकों ने बताया कि बुक फेयर में इस बार प्रवेश मुफ्त है, इसलिए अधिक लोगों के आने की आशा की जाती है.
  • Raksha Bandhan: किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा, अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा, 'रक्षाबंधन' पर मशहूर शेर
    आज 26 अगस्त को पूरा देश रक्षाबंधन मना रहा है. भाई-बहन के लिए आज का दिन बेहद खास है. यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है. इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी (Rakhi) बांधती हैं.
  • Ismat Chughtai Google Doodle: जब इस्मत चुग़ताई की रचना 'लिहाफ' ने मचाया बवाल, लाहौर हाईकोर्ट में लड़ना पड़ा था केस
    अपारंपरिक और खुले विचारों के लिए प्रसिद्ध फ़िक्शन लेखिका इस्मत चुग़ताई का आज 107वां जन्मदिन (Ismat Chughtai 107th Birthday) हैं. आज उनके जन्मदिन (Ismat Chughtai Birthday) के मौके पर गूगल ने डूडल (Google Doodle) बनाकर उन्हें याद किया है.
  • अटल बिहारी वाजपेयी की 6 मशहूर कविताएं
    पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जितना प्‍यार राजनेता के रूप में मिला उतना ही सम्‍मान उनकी लिखी कविताओं के लिए भी मिला.
  • V.S. Naipaul: पाकिस्तानी पत्रकार से वी एस नायपॉल ने की थी दूसरी शादी, जानिए उनके जीवन से जुड़ी 10 बातें
    नोबेल पुरस्कार से सम्मानित और भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वी एस नायपॉल का निधन हो गया है. शनिवार को नायपॉल के परिवार ने उनके निधन की सूचना दी. उनकी पत्नी नादिरा नायपॉल ने कहा, 'उन्होंने रचनात्मकता और उद्यम से भरी जिंदगी जी.
  •  Book Review: आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन का पुनर्पाठ
    यूं तो आदि शंकराचार्य पर केंद्रित तमाम किताबें लिखी गई हैं, लेकिन लेखक, कूटनीतिज्ञ और राजनेता पवन कुमार वर्मा की हालिया किताब "आदि शंकराचार्य-हिंदू धर्म के महानतम विचारक" तमाम किताबों से अलग है. पवन कुमार वर्मा ने मूल किताब अंग्रेजी में - "Adi Shankaracharya : Hinduism's Greatest Thinker" के नाम से लिखी है और अंग्रेजी से हिंदी में इसका तर्जुमा धीरज कुमार ने किया है. यात्रा वृतांत शैली में लिखी गई यह किताब आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन का व्यापक चित्रण है. 
  • 'हसीनाबाद' : सपने और सच के बीच का फ़ासला
    यह अंदाज़ा था कि गीताश्री जब उपन्यास लिखेंगी तो कोई स्त्री-गाथा उसके केंद्र में होगी. 'हसीनाबाद' को पढ़ते हुए इस स्तर पर उनसे निराशा नहीं होती. उनके उपन्यास के केंद्र में गोलमी नाम की एक युवा नृत्यांगना है जो 'सपने देखती नहीं बुनती है'.
  • Book Review: साए की तरह पीछा करने वाला एक अजनबी ऐसा भी...
    सोचिए यदि कोई ऐसा हो जो आपका सातों दिन चारों पहर पीछा करें तो आपको कैसा लगेगा. हमेशा डर बना रहेगा या फिर सुरक्षित रहने का एहसास होगा. इसी मजेदार अनुभव के लिए इस श्रंखला की तीनों किताब को पढ़ें.
  • उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक से NDTV की खास मुलाकात
    उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक कहते हैं कि जब हिंदी के पाठक थे, अस्सी और नब्बे का दशक था, पल्प फिक्शन का बाजार था, हिंदी साहित्य जिसे गंभीर साहित्य कहते हैं उसके प्रकाशकों ने या पल्प के प्रकाशकों ने उनलोगो ने कोई ऐसी कोशिश नहीं कि हिंदी साहित्य का बाजार बने.
  • किताब-विताब - कहीं कुछ नहीं : जीवन के राग और खटराग की कहानियां
    क्या कहानियों को हमेशा बहुत सुगठित होना चाहिए- इस तरह कि कथा कभी भटकती न लगे और एक ही लय में बात पूरी हो जाए? ऐसे उस्ताद और माहिर क़िस्सागो होते हैं जो पाठकों को बिल्कुल वशीभूत कर अपने साथ लिए चलते हैं- अनुभव और रोमांच की अपनी रची हुई दुनिया की सैर कराते हैं. पाठक इन कहानियों के संसार से अभिभूत लौटता है.
  • Book Review: श्रीलाल शुक्ल की 'राग दरबारी' का नया वर्जन है 'मदारीपुर जंक्शन'
    किसी भी कृति यानी रचना की सफलता पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर तय होती है. किताबों-उपन्यासों की सफलता अब न सिर्फ समीक्षाएं तय करती हैं, बल्कि बेस्ट सेलिंग कैटेगरी होना भी उसका मानक बन गया है. हालांकि, कुछ किताबें ऐसी होती हैं कि जो समीक्षा के इतर पाठक उससे अपने आप को इस कदर कनेक्ट करता है, कि न वह सिर्फ उसे पढ़ता है, बल्कि कईयों को सजेस्ट भी करता है. इसी कड़ी में आज पेश है एक किताब- 'मदारीपुर जंक्शन'. बालेंदु द्विवेदी की रचना 'मदारीपुर जंक्शन' किताब न सिर्फ समीक्षा की कसौटी पर खड़ी उतरती है, बल्कि पाठकों को भी गांव और इंडिया से इतर भारत के परिदृश्य को समझाने में मददगार साबित होती है. 
  • छबीला रंगबाज़ का शहर : हमारे समय में कथा-लेखन की अलग लकीर
    अपने पहले कहानी संग्रह 'छबीला रंगबाज़ का शहर' के साथ प्रवीण कुमार ने हिंदी के समकालीन कथा-संसार में एक अलग तरह की दस्तक दी है. हिंदी में प्रचलित कथा लेखन में वे दिलचस्प ढंग से तोड़फोड़ करते दिखाई पड़ते हैं.
  • मेटा 2018 : रंगकर्मी और फिल्म डायरेक्टर विजया मेहता को दिया जाएगा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
    महिन्द्रा द्वारा आयोजित किए जाने वाले सालाना महिन्द्रा एक्सिलेंस इन थिएटर अवार्ड्स (मेटा) में ‘मेटा 2018’ का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रसिद्ध रंगकर्मी, अभिनेता और फ़िल्म निर्देशक विजया मेहता को दिया जाएगा.
  • नहीं रहे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि केदारनाथ सिंह, साहित्य जगत में शोक की लहर
    हिन्दी की समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर और अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के प्रमुख कवि डॉ. केदारनाथ सिंह का आज यहां निधन हो गया. केदारनाथ सिंह 84 वर्ष के थे.  उनके परिवार में एक पुत्र और पांच पुत्रियां हैं. पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था. इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे. पेट के संक्रमण के चलते उनका आज रात करीब पौने नौ बजे एम्स में निधन हो गया.
  • उच्च शिक्षा में शोध पर दिया जाए जोर
    आज भारत में बड़ी मात्रा में बेरोजगारी है, जिसके कारण कई बार सामाजिक तनाव भी पैदा हो जाता है. आज तकनीक रोज बदल रही है, हमें बदलती तकनीक के साथ चलना होगा नहीं तो हम पिछड़ जाएंगे.
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