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Book Review: 'येरूशलम से कश्मीर तक', ऐतिहासिक तथ्यों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का तारतम्य है यह किताब

Book Review: योजेफ़ की यह किताब ख्याति प्राप्त अमेरिकी लेखक डेन ब्राउन की 'द विंची कोड' और पूरब के डेन ब्राउन करार दिए गए भारतीय लेखक अश्विन सांघी की  'द रोजाबल लाइन' की ही याद ताजा कराती है.

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Book Review: 'येरूशलम से कश्मीर तक', ऐतिहासिक तथ्यों के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का तारतम्य है यह किताब

Book Review: 'येरूशलम से कश्मीर तक'

खास बातें

  1. ईसा मसीह की यात्रा का उल्लेख है येरूशलम से कश्मीर तक
  2. योजेफ़ बानाश की मूल कृति 'कोड 1' का हिंदी अनुवाद है पुस्तक
  3. किताब में ईसा मसीह की कश्मीर तक की यात्रा के बीच कई प्रसंगों का है जिक्र
नई दिल्ली:

Book Review: स्लोवाक लेखक योजेफ़ बानाश की मूल कृति 'कोड 1' का हिंदी अनुवाद है 'येरूशलम से कश्मीर तकः ईसा मसीह की जीवन यात्रा'. योजेफ़ की यह किताब ख्याति प्राप्त अमेरिकी लेखक डेन ब्राउन की 'द विंची कोड' और पूरब के डेन ब्राउन करार दिए गए भारतीय लेखक अश्विन सांघी की  'द रोजाबल लाइन' की ही याद ताजा कराती है. उक्त दो किताबों की तरह ही योजेफ़ बानाश की 'येरूशलम से कश्मीर तक' पढ़ कर लगता है कि श्रीनगर के सूफी संत युज आसिफ की दरगाह रोजाबल समाधि वास्तव में ईसा मसीह की ही कब्र है.

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ईसा मसीह की भारत यात्रा को पुष्ट करने के लिए योजेफ़ बानाश ने और भी ढेरों प्रतीकों का सहारा लिया है. कथ्य में उन्हें इस तरह पिरोया गया है कि वह सच प्रतीत होते हैं. मसलन किताब के अनुसार ईसा मसीह की गंभीर रोगियों को ठीक कर देने की 'ईश्वरीय' अनुकंपा प्राचीन तक्षशिला विश्वविद्यालय में उपलब्ध चिकित्सा शास्त्र की अनगिनत किताबों की देन थी. इसे और अमलीजामा पहनाने के लिए योजेफ ने दक्षिण भारत से ईसा मसीह की कश्मीर तक की यात्रा के बीच कई प्रसंगों को जिक्र किया है. यही नहीं, उन्होंने यहूदी धर्म ग्रंथों में उल्लेखित किंवदंतियों को भारतीय वेदों और पुराणों से मिलान कर उन्हें स्थापित करने की कोशिश की है. मसलन, योजेफ़ अपनी किताब में एक जगह कहते हैं...'क्या यह विचित्र नहीं है कि तुम्हारे तोरा के अनुसार अब्राहम समग्र देशों का पिता है और वेदों के अनुसार ब्रह्मा समग्र सृष्टि के पिता हैं.' एक और उदाहरण देखें... 'हमारे एक वेद में लिखा है कि पृथ्वी पर पहले पुरुष और स्त्री 'अस्त' और 'एम्बला' थे.' इस पर यीशू सिर हिलाते हुए कहते हैं-'हमारे आदम और ईव.'


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किताब में इस तरह के ढेरों प्रसंग दो अलग-अलग समानांतर कालखंडों में पिरोयी गई कहानियों में चलते हैं. एक है मिषाल की पत्नी मारिका के पात्रों का. मारिका को स्तन कैंसर है और उसे विश्वास है कि ईसा मसीह की कब्र पर प्रार्थना कर लेने से उसका स्तन कैंसर ठीक हो जाएगा. ईसा मसीह की कब्र पर प्रार्थना की मारिका की इच्छा उसे येरूशलम ले जाती है, जहां तोमाश से मुलाकात उसे भारत के प्रांत कश्मीर तक ले आती है. कश्मीर उन दिनों आतंक के साये से बुरी तरह घिरा होता है. भारतीय सेना आतंक का दमन करने के लिए श्रीनगर के चप्पे-चप्पे पर तैनात है. ऐसे में मारिका को स्थानीय डॉक्टर बशरत और उनका बेटा अली उस कब्र तक ले जाने को तैयार होता है, जो कथित तौर पर ईसा मसीह की कब्र भी कही जाती है.

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इसके सामानांतर ही ईसा मसीह की कहानी चलती है. यह कहानी बताती है कि ईसा मसीह ने असाध्य रोगों से पीड़ित रोगियों को ठीक कर देने का शफा कहीं ओर से नहीं, बल्कि विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला विश्वविद्यालय से प्राप्त किया था. तक्षशिला में ईसा के आगमन से पांच सौ साल पहले एक एक ग्रीक विद्वान पढ़ाया करता था, जिन्होंने ईसा के भारत आगमन की 'भविष्यवाणी' की थी. कहानी के इस दूसरे सिरे के आधार पर स्थापित किया जाता है कि ईसाम मसीह की मृत्यु सलीब पर नहीं हुई थी, बल्कि सलीब पर चढ़ाए जाने के बाद उन्हें भारत ले जाया गया था. दक्षिण भारत से शुरू हुआ ईसा मसीह का सफर तक्षशिला होते हुए कश्मीर तक पहुंचता है, जहां लगभग 70 साल की उम्र में वह अंततः मृत्यु को प्राप्त होते हैं. इस सामानांतर कहानी को विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए ढेरों प्रसंगों का सहारा लिया गया है.

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'येरूशलम से कश्मीर तक' अपने रोचक प्रसंगों से पठनीय बन जाती है. फिक्शन के शौकीनों को इसमें खासा आनंद आएगा. ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण का तारतम्य किताब की विषयवस्तु को बोझिल नहीं होने देता. इसके साथ ही किताब में मध्य यूरोप के कई समकालीन कालखंडों को भी पिरोया गया है. ये तथ्य कहानी को विश्वसनीयता के लिहाज से एक मजबूत नींव प्रदान करते हैं. इन अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का इस्तेमाल हिंदी के पाठकों के लिए किसी थ्रिलर फिल्म का अहसास ही कराएगा.

समीक्षक: सरस्वती रमेश

किताब: येरूशलम से कश्मीर तक- ईसा मसीह की जीवन यात्रा 


लेखकः योजेफ़ बानाश

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प्रकाशकः राजपाल एंड सन्स


कीमतः 395 रुपए



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