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राजेश खन्ना की वजह से आडवाणी को जाना पड़ा था गांधीनगर, पढ़ें 1991 की दिलचस्प चुनावी जंग

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को चुनावी अखाड़े में जबरदस्त चुनौती दी थी.

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राजेश खन्ना की वजह से आडवाणी को जाना पड़ा था गांधीनगर, पढ़ें 1991 की दिलचस्प चुनावी जंग

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) vs लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani)

खास बातें

  1. राजेश खन्ना की वजह से आडवाणी को जाना पड़ा था गांधीनगर
  2. राजेश खन्ना की लोकप्रियता आडवाणी पर पड़ी थी भारी
  3. राजेश खन्ना और आडवाणी में हुई थी जबरदस्त टक्कर
नई दिल्ली:

राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) हिंदी फिल्मों में स्टारडम की नई परिभाषा गढ़ने वाले एक्टर ही नहीं थे बल्कि उन्होंने राजनीति में भी अपनी चमक बिखेरी थी. राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) नई दिल्ली लोकसभा सीट से साल 1992-1996 तक कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे थे. राजेश खन्ना ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को चुनावी अखाड़े में जबरदस्त चुनौती दी थी. राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) से मिली इस चुनौती के बाद कहा जाता था कि लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को दिल्ली छोड़कर गुजरात जाना पड़ा था. बीजेपी ने साल 1991 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में नई दिल्ली सीट से अपने धाकड़ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को मैदान में उतारा था, लेकिन वो राजेश खन्ना की चमक के आगे फिके नजर आए थे.

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भारतीय राजनीति में 90 के दशक में लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) का डंका बजता था. नई दिल्ली सीट पर साल 1991 के लोकसभा चुनाव में राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) और लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली थी. इस चुनाव में लालकृष्ण आडवाणी ने बाजी तो मार ली, लेकिन वो राजेश खन्ना की लोकप्रियता से टक्कर नहीं ले सके. इस सीट पर आडवाणी ने बेहद ही कम मार्जन से जीत हासिल की थी. नई दिल्ली सीट पर  लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को 93,662 मिले थे, जबकि हिंदी फिल्मों के सुपरस्टार राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) को  92,073 मिले थे. वोटों के अंतर को देख कहा जा सकता है कि दोनों की हार-जीत में कोई बहुत बड़ा अंतर नहीं था.

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राजनीति में कोई तजुर्बा ना होने के बावजूद भी  राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) ने जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे उन्होंने अपनी लोकप्रियता का सिक्का जमा दिया था. चुनाव में कड़ी टक्कर मिलने के बावजूद भी आडवाणी ने कभी राजेश खन्ना से द्वेष नहीं रखा. आडवाणी ने उस दौरान अपने और राजेश खन्ना के राजनीतिक संबंधों पर तो कभी बयान नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कहते रहे कि राजेश खन्ना बहुत अच्छे इंसान थे और उनकी हमेशा याद आएगी.

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लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) ने साल 1992 में इस सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद फिर इस सीट पर उपचुनाव हुआ. कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर इस सीट से राजेश खन्ना (Rajesh Khanna)को प्रत्याशी बनाया, जबकि बीजेपी ने उनकी लोकप्रियता को टक्कर देने के लिए बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) को मैदान में उतारा था. लेकिन इस बार राजेश खन्ना ने भारी मतों के अंतर से शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) को पटखनी दे दी थी. राजेश खन्ना ने कुल 101625 मत हासिल कर 28,256 मतों के अंतर से उन्हें हराया था. राजेश खन्ना इसके बाद 1992-96 तक लोकसभा सदस्य रहे.

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साल 1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) को फिर से मैदान में उतारा और बीजेपी ने जगमोहन को उनके सामने खड़ा किया था. लेकिन इस चुनाव में राजेश खन्ना 58,315 मतों के अंतर से चुनाव हार गए.

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