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गुजरात में जीत के बाद निगाहें अब CM के चेहरे पर, जानें कौन मार सकता है बाजी!

गुजरात चुनाव में बीजेपी के बहुमत के आंकड़े को पार करने के बाद लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि राज्‍य का मुख्‍यमंत्री कौन होगा.

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गुजरात में जीत के बाद निगाहें अब CM के चेहरे पर, जानें कौन मार सकता है बाजी!

विजय रूपानी के अलावा नितिन पटेल और पुरुषोत्‍तम रूपानी भी सीएम पद के दावेदार हैं (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. 2012 के चुनाव से कम रहेंगी इस बार सीटें
  2. 'औसत' प्रदर्शन से रूपानी पर उठ सकते हैं सवाल
  3. रूपाला और नितिन पटेल को भी माना जा रहा दावेदार
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गुजरात चुनाव में बीजेपी के बहुमत के आंकड़े को पार करने के बाद लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि राज्‍य का मुख्‍यमंत्री कौन होगा. उत्‍सुकता इस बात की है कि सीएम की कमान फिर विजय रूपानी संभालेंगे या फिर शीर्ष नेतृत्‍व किसी नए चेहरे को मौका देगा. एक तरह से यह चुनाव रूपाणी सरकार के प्रदर्शन का 'टेस्‍ट' था, जिसमें मुश्किलों के बाद ही वे सफल हो पाए. 150 सीटें जीतने का दावा करने वाली बीजेपी के खाते में करीब 100 से 105 सीटें आने के आसार हैं जो कि पिछले चुनाव से कम है. वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 115 सीटों पर जीत हासिल की थी.इस 'औसत' प्रदर्शन के बाद रूपानी की कुर्सी पर सवाल उठ सकते हैं. राजनीतिक विश्‍लेषकों की राय में सीटों की संख्‍या में आई यह कमी विजय रूपानी के लिए मुश्किल का सबब बन सकती है और उनकी जगह सीएम पद पर नया चेहरा लाने की मांग जोर पकड़ सकती है.

वैसे भी, नरेंद्र मोदी के पीएम के रूप में केंद्र में जाने के बाद राज्‍य में बीजेपी की लोकप्रियता का ग्राफ गिरा है. मोदी के केंद्र में जाने के बाद आनंदी बेन पटेल को सीएम बनाया गया था. आनंदी बेन के कार्यकाल के दौरान ही पाटीदार आंदोलन में जोर पकड़ा और इस आंदोलन को शुरुआती दौर में नियंत्रित नहीं कर पाने को लेकर सीएम की कार्यक्षमता पर सवाल उठे. ऐसे में उम्र के 70+ के फार्मूले के आधार पर आनंदी बेन की सम्‍मानजनक विदाई का रास्‍ता तैयार कर रूपानी के लिए राह बनाई गई थी, लेकिन वे भी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे. पाटीदार समाज की नाराजगी, दलित समाज पर ज्‍यादती की कथित घटनाओं और एंटी इनकमबेंसी फैक्‍टर ने बीजेपी के लिए इस बार चुनाव को मुश्किल बना दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी प्रमुख अमित शाह का गृह राज्‍य होने के कारण ये चुनाव पार्टी के लिए बेहद प्रतिष्‍ठापूर्ण थे.

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जीत के लिए पार्टी को पूरी ताकत झोंकनी पड़ी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत सुनिश्चित करने के लिए धुआंधार सभाएं की. यही नहीं, केंद्रीय कैबिनेट के कद्दावर मंत्री भी इस दौरान गुजरात में डेरा डाले रहे. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, गुजरात का चुनावी समर जीतने के बाद अब डैमेज कंट्रोल के तहत किसी पाटीदार को राज्‍य की बागडोर सौंप सकती है. पाटीदार समाज का फिर से भरोसा जीतने के लिए ऐसा किया जा सकता है. इसमें प्रमुख नाम केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्‍तम रूपाला है जो पाटीदार समाज से होने के साथ-साथ अनुभवी भी हैं. सौराष्ट्र के अमरेली से आने वाले रूपाला गुजरात के मंत्री रह चुके हैं और इस समय राज्‍यसभा सांसद हैं. रूपाला गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष भी रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरोसा भी उन्‍हें हासिल है. रूपाला के अलावा मौजूदा उपमुख्‍यमंत्री नितिन पटेल को भी सीएम के दावेदारों में शुमार किया जा रहा है.



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