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सीएम नीतीश कुमार के बाद अब केंद्रीय मंत्री ने भी बिहार में बाढ़ के लिए 'हथिया नक्षत्र' को बताया जिम्मेदार 

राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम से इतर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से बिहार में जारी मूसलाधार बारिश ‘हथिया नक्षत्र’ के कारण हो रही है.

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सीएम नीतीश कुमार के बाद अब केंद्रीय मंत्री ने भी बिहार में बाढ़ के लिए 'हथिया नक्षत्र' को बताया जिम्मेदार 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार में बारिश को लेकर दिया बयान

खास बातें

  1. अश्विनी चौबे ने एक कार्यक्रम में दिया यह बयान
  2. पटना में हुए जल जमाव को लेकर बोल रहे थे चौबे
  3. सीएम नीतीश कुमार ने भी दिया था ऐसा बयान
पटना:

बिहार के कई जिले इन दिनों बाढ़ की चपेट में है. यहां हो रही लगातार बारिश ने हालात को और भी खराब बना दिया है. आम जनजीवन खासा प्रभावित हुआ है. लेकिन इन सब के बीच सूबे के सीएम नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे राज्य में हो रही लगातार बारिश और उससे हो रही तबाही के लिए नक्षत्र को जिम्मेदार बता रहे हैं. केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि राज्य में ‘‘हथिया नक्षत्र'' के कारण जबरदस्त बारिश हो रही है. राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम से इतर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से बिहार में जारी मूसलाधार बारिश ‘हथिया नक्षत्र' के कारण हो रही है. हथिया नक्षत्र में कभी कभी बहुत भयंकर बारिश होती है. बारिश ने अब प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया है.

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अश्विनी चौबे ने कहा कि बिहार की भाजपा-जद (यू) गठबंधन सरकार, जिला प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग 24 घंटे राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं और स्थिति से निपटने के लिए काम कर रहे हैं . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री समेत पूरी राज्य सरकार स्थिति की नजदीक से निगरानी कर रही है. जिन लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है उनको राहत पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. मौसम विभाग ने कहा है कि मॉनसून की सबसे अधिक देरी से वापस हो सकती है और बिहार सहित कई राज्यों में बारिश जारी है. प्रदेश में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं जबकि बाढ़ के कारण रेलवे यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल और बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई हैं. इससे पहले सीएम नीतीश कुमार भी राज्य में हो रही भारी बारिश और उससे होने वाली तबाही के लिए हथिया नक्षत्र को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं.

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गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में मुसलाधार बारिश की वजह से बीते कुछ दिनों से जलजमाव की स्थिति है. खास तौर पर पटना और आसपास के जिलों में हालात ज्यादा खराब हैं. मौसम विभाग ने राज्य में बारिश को लेकर अलर्ट भी जारी किया है.राज्य सरकार के अनुसार बिहार के कई जिलों में हो रही बारिश की वजह से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 41 हो गया है. NDRF की कई टीमें प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का कार्य कर रही है. बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पटना में बाढ़ से बिगड़े हालात को देखते हुए वायुसेना से मदद मांगी है. हालांकि, सोमवार देर रात से पटना में बारिश नहीं हुई है. 

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बता दें कि पिछले कई दिन से हो रही बारिश के कारण बिहार और उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्से सोमवार को बाढ़ की चपेट में रहे वहीं देश भर में वर्षा जनित हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या 148 पर पहुंच गई हैं. भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि देश में 1994 के बाद इस मानसून में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई. मौसम विभाग ने इसे ‘सामान्य से अधिक' बताया. मानसून सोमवार को आधिकारिक रूप से तो समाप्त हो गया लेकिन यह देश के कुछ हिस्सों के ऊपर अभी भी सक्रिय है. मौसम विभाग के 36 उपमंडलों में से दो..पश्चिम मध्य प्रदेश और सौराष्ट्र एवं कच्छ..में ‘‘काफी अधिक'' वर्षा दर्ज की गई. बिहार में बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है.

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बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि राज्य सरकार ने वायुसेना से पानी में डूबे स्थानों में खाने के पैकेट व अन्य सामग्रियां गिराने के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजने का आग्रह किया है. लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान पटना में अपने घर के बदले एक होटल में रुके हुए हए हैं. सोमवार दोपहर में तीन और लोगों के बारिश की वजह से मरने की खबर आई है. इनमें से एक व्यक्ति की मौत नवादा और दो लोगों की मौत जहानाबाद जिले में हुई. सुबह में बारिश थमी थी लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पटना में सोमवार देर शाम बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है. 

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मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शहर में इस मानसून में एक जून से 30 सितम्बर तक 404.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जबकि 30 वर्ष का औसत 648.9 मिलीमीटर है. इस तरह से इस वर्ष 38 प्रतिशत कम वर्षा हुई। मानसून इस वर्ष सामान्य से एक सप्ताह की देरी से आया था. मानसून ने आठ जून को केरल के ऊपर से शुरूआत की थी लेकिन जून में इसकी गति सुस्त हो गई थी और जून में 33 प्रतिशत कम वर्षा हुई थी. यद्यपि मानसून ने जुलाई में गति पकड़ी और सामान्य से 33 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई. अगस्त में भी सामान्य से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले दो वर्षों के दौरान अधिक वर्षा दर्ज की गई थी. 

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दिल्ली में 2018 में 770.6 मिलीमीटर और 2017 में 672.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इस वर्ष जून में दिल्ली में मात्र 11.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई जबकि सामान्य 65.5 मिलीमीटर है. इस तरह से जून में 83 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई. जुलाई महीने में यहां 24 प्रतिशत कम वर्षा हुई क्योंकि मात्र 210.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पिछले कई दिनों से हो रही बारिश से कई स्थानों पर जनजीवन खासा प्रभावित हुआ है. बलिया के समूचे जिला कारागार परिसर में कमर तक पानी भर जाने के कारण कम से कम 900 कैदियों को दूसरे जिलों की जेलों में भेजना पड़ा. 

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VIDEO: पटना में हर तरफ पानी ही पानी.



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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