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Arun Jaitley Demise : परदे के पीछे रहकर योजना बनाने में माहिर थे पूर्व वित्त मंत्री, सभी पार्टियों में थे उनके दोस्त

अरुण जेटली (Arun jaitley) ऐसे नेता थे जिनका सभी पार्टियों के राजनेताओं के साथ घनिष्ट संबंध थे. उनका यही अंदाज उन्हें दूसरे से अलग बनाता था.

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खास बातें

  1. 66 वर्ष की उम्र में अरुण जेटली का निधन
  2. एम्स में ली आखिरी सांस
  3. आज होगा अरुण जेटली का अंतिम संस्कार
नई दिल्ली:

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का 66 वर्ष की उम्र में शनिवार को निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और एम्स में भर्ती थे. अरुण जेटली का निधन बीजेपी के लिए एक बड़े नुकसान की तरह है. उनके निधन पर पीएम मोदी से लेकर तमाम वरिष्ठ नेताओं ने अपनी संवेदना व्यक्त की थी. पीएम मोदी ने कहा था कि उनकी कमी पार्टी में कोई पूरी नहीं कर सकता. मैंने आज सिर्फ पार्टी का नेता नहीं बल्कि अपने एक करीबी दोस्त भी खोया है. बता दें कि बीते 18 दिनों में बीजेपी ने अपने दो बड़े नेता खोए हैं. इसी महीने की छह तारीख को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ था. 

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सुषमा स्वराज की तरह ही अरुण जेटली भी वकालत करने के साथ-साथ राजनीति में सक्रिय हुए थे. अरुण जेटली ऐसे नेता थे जिनका सभी पार्टियों के राजनेताओं के साथ घनिष्ट संबंध थे. उनका यही अंदाज उन्हें दूसरे से अलग बनाता था. पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में नंबर दो की पोजिशन रखने वाले अरुण जेटली परदे के पीछे से पार्टी व सरकार के लिए रणनीति बनाने और उसे धरातल पर लागू करने में माहिर माने जाते थे. 

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लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बात अरुण जेटली ने पीएम मोदी से अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए नई कैबिनेट में शामिल न होने की इच्छा जताई थी. उन्होंने पीएम से को लिखा कि मैं आपसे विनम्र निवेदन करना चाहता हूं कि मैं खुदके लिए थोड़ा समय चाहता हूं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहती है  ऐसे में मैं पार्टी द्वारा दी जाने वाली किसी भी जिम्मेदारी को निभा पाने में खुदको असमर्थ महसूस कर रहा हूं. 

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अपने खराब स्वास्थ्य के कारण ही जेटली (Arun Jaitley) ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा. पिछले साल 14 मई को एम्स में उनके गुर्दे का प्रतिरोपण हुआ था और उस वक्त उनकी जगह रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था. गौरतलब है कि अरुण जेटली के लिए राजनीतिक हलकों में अनौपचारिक तौर पर माना जाता था कि वह 'पढ़े लिखे विद्वान मंत्री' हैं. पिछले तीन दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह की काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता तंत्र के पसंदीदा लोगों में रहे, सरकार चाहे जिसकी भी रही हो.

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अति शिष्ट, विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार रहे जेटली भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मुख्य संकटमोचक थे जिनकी चार दशक की शानदार राजनीतिक पारी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते समय से पहले समाप्त हो गई. खराब सेहत के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार बनी सरकार से खुद को बाहर रखने वाले 66 वर्षीय जेटली का शनिवार को यहां एम्स में निधन हो गया. सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें यहां भर्ती कराया गया था. सर्वसम्मति बनाने में महारत प्राप्त जेटली को कुछ लोग मोदी का ऑरिजनल 'चाणक्य' भी मानते थे जो 2002 से मोदी के लिए मुख्य तारणहार साबित होते रहे. मोदी तब मुख्यमंत्री थे और उनपर गुजरात दंगे के काले बादल मंडरा रहे थे. 

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