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क्यों कांग्रेस के लिए कर्नाटक की हार 'सिर उठाकर' चलने की वजह है...

कांग्रेस के लिए सिर उठाकर घूमने की सबसे बड़ी वजह है कि उसका वोट प्रतिशत बढ़ा है. वर्ष 2013 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस को एक फीसदी से भी ज़्यादा का लाभ हुआ है

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क्यों कांग्रेस के लिए कर्नाटक की हार 'सिर उठाकर' चलने की वजह है...
नई दिल्ली: गुजरात में बहुमत भले ही नहीं मिल पाया था, लेकिन कांग्रेस ने मिले जनसमर्थन को 'नैतिक जीत' घोषित किया था, और BJP ने उसका जमकर मज़ाक उड़ाया था... अब लगता है, उन्हें उस वक्त चुप रहना चाहिए था, क्योंकि अब कर्नाटक में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देने के बावजूद BJP बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई है, और अब मुमकिन है कि उन्हें 'नैतिक जीत' पर संतोष करना पड़े... बशर्ते वे JDS या कांग्रेस के कुछ विधायकों को 'खरीदने' में कामयाब न हो जाएं, और उस स्थिति में वे अपनी 'नैतिक जीत' को 'अनैतिक' बना डालेंगे...

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन (Observer Research Foundation) के फेलो मिहिर स्वरूप शर्मा ने NDTV.com के लिए लिखे आलेख - Why Congress Defeat In Karnataka Is A Respectable One में कहा है कि इसमें कोई शंका नहीं कि कांग्रेस के पास जश्न मनाने की शायद ही कोई वजह हो, क्योंकि उन्हें तटीय कर्नाटक में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है - गौरतलब है कि यह इलाका RSS के ध्रुवीकरण से जुड़े प्रयोगों की प्रयोगशाला रहा है - और अब सत्ता की आशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें ऐसी एक पार्टी के पीछे चलना पड़ेगा, जो उनकी तुलना में बेहद कम सीटें ला पाई है... लेकिन इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट नज़र आ रहा है कि कांग्रेस के पास अपना सिर उठाकर चलने की भी कई वजहें हैं...

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मिहिर स्वरूप शर्मा के मुताबिक, कांग्रेस के लिए सिर उठाकर घूमने की सबसे बड़ी वजह है कि उसका वोट प्रतिशत बढ़ा है... वर्ष 2013 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में कांग्रेस को एक फीसदी से भी ज़्यादा का लाभ हुआ है, और यह एक ऐसे राज्य में बेहद बड़ी उपलब्धि है, जो सत्ताधारी पार्टी को उखाड़ फेंकने के लिए ही जानी जाती रही है...

दूसरी ओर, BJP को भी आत्मनिरीक्षण करना होगा... वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुत ज़्यादा निर्भर हो गई है... इसके अलावा 'कांग्रेस-मुक्त भारत' का उद्देश्य हासिल करने के लिए वह किसी भी और किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार करने योग्य मानने लगी है... 75 वर्ष से अधिक आयु के नेताओं को स्वीकार नहीं करने के नियम को कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के लिए भुला दिया गया... जो पार्टी भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ सबसे ज़्यादा आवाज़ उठाती रही है, उसने बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं को लगे लगाया, जो भारत में माफिया-राजनीति गठजोड़ का सबसे बड़ा उदाहरण हैं...

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