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असदुद्दीन ओवैसी बोले- भारत रत्न के लिए चुनते समय मुसलमानों और दलितों की होती है अनदेखी

ओवैसी ने कहा कि आज तक जितने लोगों को यह सम्मान मिला उसमें मुसलमानों और दलितों की तुलना में अपर कास्ट का क्या शेयर रहा.

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खास बातें

  1. सरकारें सिर्फ अपने लिए काम करने वालों को देती है यह सम्मान - ओवैसी
  2. ओवैसी ने नाम चुनने के लिए कमेटी बनाने की कही बात
  3. प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देने पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली:

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारत रत्न को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने NDTV के कार्यक्रम हम लोग में कहा आज भारत रत्न हर किसी को मिल जा रहा है. अगर आप भी उस लिस्ट को ध्यान से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि उसमें मुसलमानों और दलितों की साफ तौर पर अनदेखी हो रही है. उन्होंने देश के सर्वोच्च सम्मान को दिए जाने के लिए एक ऐसी कमेटी बननी चाहिए जो देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए इस सम्मान के लिए लोगों के नाम का चयन करें. आज भारत रत्न सिर्फ बाह्मनों का क्लब बन गया है. ओवैसी ने कहा कि आज तक जितने लोगों को यह सम्मान मिला उसमें मुसलमानों और दलितों की तुलना में अपर कास्ट का क्या शेयर रहा. अभी तक 48 हस्तियों को यह मिला जिसमें एक भी आदिवासी नहीं है. यह अवॉर्ड आज सरकार द्वारा सिर्फ अपनी पार्टी के आधार पर लोगों को खुश करने के लिए यह दिया जा रहा है.

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ओवैसी ने प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने को लेकर भी सवाल खड़े गए. उन्होंने कहा कि मुझे यह समझ नहीं आता कि पीएम मोदी कहते हैं यूपीए के काल में जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे उस समय देश में एनपीए सबसे ज्यादा थी और इसी वजह से देश की अर्थव्यवस्था खराब हो गई. लेकिन बाद में आप उन्हें भारत रत्न देते हैं. लगता है प्रणब मुखर्जी को आरएसएस मुख्यालय जाने का फायदा मिल गया. ओवैसी ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय को भारत रत्न दिए जाने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्या की मौत की जांच के लिए के बाद चंद्रचूड़ आयोग बनाया गया. इस आयोग ने कहा कि एक शख्स ने फर्जीवाड़ा किया लेकिन आपने उन्हें भी भारत रत्न दे दिया. 

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असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कहा कि दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की सबसे बड़ी लड़ाई यह है कि सबसे बड़ा हिन्दू कौन है? यही उनकी सबसे बड़ी लड़ाई है. आप देखते होंगे कि चाहे राहुल गांधी हो या नरेंद्र मोदी..इनमें यह कॉम्पिटीशन है कि आप दो मंदिर जाएंगे तो हम पांच मंदिर जाएंगे...आप चलकर जाएंगे तो मैं तालाब में प्लेन को उतार दूंगा. ओवैसी ने कहा, 'मैं आवाम का एजेंट हूं. मैं अपनी राजनीति कर रहा हूं. मैं 8 साल यूपीए के साथ था. कई बार मैं कांग्रेस अध्यक्ष के घर गया. उस समय तो मैं बहुत नेक आदमी था, आज मैं बुरा हो गया क्योंकि मैं अब उनकी मुखालफत कर रहा हूं.' 

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'मेरी हालत रजिया गुंडों में फंस गई जैसी'
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस का और कांग्रेस बीजेपी से मिले होने का आरोप लगाती रही है. इस बार में जब ओवैसी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'आज देश में ऐसा माहौल है कि जो कांग्रेस का विरोध करेगा वह बीजेपी का एजेंट हो जाता है. जो मोदी के खिलाफ बोलता है वह राष्ट्रद्रोही हो जाता है. मेरी तो हालत ऐसी हो गई है कि हमारे हैदराबाद में उर्दू में एक कहावत है कि 'फंस गई रजिया गुंडों में' वैसी हो गई है. मैं बीजेपी के खिलाफ बोलूंगा तो राष्ट्रद्रोही है ये, कांग्रेस के खिलाफ बोलूंगा तो बोलेंगे बी-टीम है ये, सी-टीम है ये. पैसे ले रखा है इनलोगों ने. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मैंने कई बार कहा कि कुछ तो दिलाओं मुझे पैसे...अभी तक तो नहीं मिले हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद हैदराबाद आए थे. उन्होंने मेरे चुनावी क्षेत्र में तीन सभाएं की. उन्होंने तोते की तरह रट-रटकर कहा की सी-टीम है...सी-टीम है. पैसे ले लिए....वोट काटते हैं, लेकिन हैदराबाद की जनता ने बता दिया कि कौन बीजेपी को हरा सकता है. 

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तेलंगाना में 17-0 का लक्ष्य
उन्होंने कहा कि हम तेलंगाना में केसीआर के साथ है, जो मुख्यमंत्री हैं. हमारी पूरी कोशिश होगी कि तेलंगाना की 17 सीटों पर 17-0 का रिजल्ट आए. वहां न बीजेपी जीते और न कांग्रेस जीते. दूसरा आंध्र प्रदेश में भी जगनमोहन रेड्डी हमारे करीबी दोस्त हैं. उनसे भी हमारी बात चल रही है. कोशिश हो रही है कि वह भी वहां 20 से ज्यादा सीटें जीत पाएं. महाराष्ट्र में प्रकाश आंबेडकर के साथ गठबंधन है. बाकी जगहों पर जो होगा देखा जाएगा. 

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क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका अहम
उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान में 350 ऐसी सीटें हैं जहां क्षेत्रीय पार्टी काफी मजबूत हैं. बिना इनके कुछ होने वाला नहीं है. अगर 2019 में रिजनल पार्टी 30% वोट क्रॉस करते हैं तो यकीनन उनके बिना कोई सरकार नहीं बनेगा. मेरी ख्वाइश है कि इस मुल्क को नॉन कांग्रेस और नॉन बीजेपी सरकार मिले.

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सवर्ण आरक्षण पर सरकार के खिलाफ
ओवैसी ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता. संविधान में इसका प्रावधान ही नहीं है. मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में यह नहीं टिकेगा. बता दें कि संसद में आर्थिक आधार पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने इसका विरोध किया था.

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