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गुजरात विधानसभा चुनाव : पहले चरण में इस मामले में बीजेपी से भी आगे निकली कांग्रेस

आंकड़े देखकर ऐसा लगता है कि इन पार्टियों ने दागी कैंडिडेट को टिकट देने में ही दूसरी पार्टियों से प्रतिस्पर्धा कर ली है. 

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गुजरात विधानसभा चुनाव : पहले चरण में इस मामले में बीजेपी से भी आगे निकली कांग्रेस

फाइल फोटो

खास बातें

  1. पहले चरण में 923 में से 137 दागी उम्मीदवार.
  2. दागी उम्मीदवारों के मामले में भाजपा से आगे कांग्रेस.
  3. पहले चरण में 57 महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में.
नई दिल्ली: गुजरात विधानसभा चुनाव के 'रण' में विजयी पताका लहराने के लिए सभी पार्टियां एड़ी-चोटी का दम लगा रही हैं. कांग्रेस, भाजपा, बसपा सरीखीं कई पार्टियां चुनाव में जीत का सेहरा अपने नाम करने के लिए एक से बढ़ कर एक चुनावी कसीदे पढ़ रही हैं. भ्रष्टाचार और ईमानदारी का चोला पहन भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने प्रत्याशियों के लिए धुआंधार चुनावी रैलियां कर रही हैं, मगर जब हकीकत पर नजर दौड़ाएंगे तो आप पाएंगे कि ये सभी पार्टियां रैलियों में वोटर्स को लुभाने के लिए खोखले और झूठे वादे कर रही हैं. दरअसल, सभी पार्टियां लोकतंत्र की दुहाई देकर अपराधिक छवि के लोगों को टिकट न देने का वादा तो कर देती है, मगर चुनाव के समय अपनी ही बातों से पार्टियां मुकरती हुई नजर आने लगती है. आंकड़े देखकर ऐसा लगता है कि इन पार्टियों ने दागी कैंडिडेट को टिकट देने में ही दूसरी पार्टियों से प्रतिस्पर्धा कर ली है. 

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गुजरात विधानसभा चुनाव दो चरणों में हो रहे हैं. पहले चरण का मतदान 9 दिसंबर को होना और दूसरी चरण का मतदान 14 को. मगर अभी आप पहले चरण के लिए चुनावी रण में उतरे सभी पार्टियों के उम्मीदवारों पर नजर दौड़ाएंगे तो आप पाएंगे कि कोई भी पार्टी चुनावी शुचिता का जरा सा भी ख्याल नहीं रख रही हैं. राजनीतिक पार्टियों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए बिना किसी बात की परवाह किए धड़ल्ले से ऐसे लोगों को टिकट दिये हैं, जिनके ऊपर विभिन्न तरह के आपराधिक मामले दर्ज हैं. 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में गुजरात चुनाव के पहले चरण में खड़े हुए प्रत्याशियों का रिकॉर्ड जारी किया है. 

पहले चरण के चुनाव के 7 चौंकाने वाले फैक्ट्स :-

1. गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में कुल 923 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं, जिनमें से 137 उम्मीदवारों के खिलाफ क्रिमिनिल केस दर्ज हैं. यानी इस आंकड़े को प्रतिशत में समझा जाए तो पहले चरण के कुल उम्मीदवारों की संख्या में से 15 फीसदी उम्मीदवार क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं.  हैरान करने वाली बात है कि इनमें से 78 कैंडिडेट ऐसे हैं, जिनके खिलाफ सीरियस क्रिमिनल रिकॉर्ड्स हैं. यानी कि 9 फीसदी कैंडिडेट पर सीरियस क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं. 

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2. पहले चरण के मतदान में कांग्रेस की तरफ से 86 कैंडिडेट चुनावी मैदान में हैं, जिनमें से 31 के खिलाफ आपराधिक मामले और 20 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. वहीं, भाजपा की ओर से 89 कैंडिडेट में से 22 के खिलाफ आपराधिक मामले और 10 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. 

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3. एनसीपी की ओर से 28 कैंडिडेट मैदान में हैं, जिनमें से 4 के खिलाफ आपराधिक मामले और 3 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. अगर मायावती की पार्टी बसपा की बात करें तो 60 कैंडिडेट्स में से 11 के खिलाफ आपराधिक मामले और 8 के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी से 19 कैंडिडेट में से 2 क्रिमिनल बैकग्राउंड से हैं, और एक के ऊपर संगीन आपराधिक मामला दर्ज है. यही हाल अन्य क्षेत्रिय पार्टियों और निर्दलीय प्रत्याशियों का है. 

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4. पहले चरण के प्रत्याशियों के एजुकेशनल बैकग्राउंड पर भी नजर डालेंगे तो स्थिति काफी बेहतर नहीं दिखेगी. एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक, 923 कैंडिडेट्स में से 580 लोगों ने अपनी पढ़ाई को लेकर ये घोषणा की है कि वे 5वीं से 12वीं तक ही पढ़े हुए हैं. वहीं, 217 कैंडिडेट की पढ़़ाई स्नातक तक या उससे ऊपर. वहीं, 76 कैंडिडेट सिर्फ साक्षर हैं और 17 कैंडिडेट अनपढ़ हैं. इसके अलावा 12 लोगों ने अपनी पढ़ाई के बारे में किसी तरह की जानकारी मुहैया नहीं कराई है. 

5. कैंडिडेट्स के उम्र की बात करें तो 367 उम्मीदवार की आयु 25 से 40 साल के बीच है. वहीं, 473 उम्मीदवारों की आयु 41 से 60 साल के बीच है और 82 कैंडिडेट 61 से 80 साल के बीच के हैं. 

6. अगर पहले चरण के महिला प्रत्याशियों की संख्या पर नजर दौड़ाएं तो इस चरण में महज 57 महिला उम्मीदवारों को ही चुनावी मैदान में अपना भाग्य आजमाने का मौका मिला है. 

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7. उम्मीदवारों के आय के स्रोतों की बात करें तो 923 में से 76 उम्मीदवारों ने अपने आय के स्रोत का किसी तरह का ब्योरा नहीं दिया है. वहीं, 923 में से 471 उम्मीदवारों ने अपने इनकम टैक्स डिटेल्स के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है.  

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